नई दिल्‍ली: महा विकास अघाडी के संयुक्‍त उम्‍मीद कांग्रेस विधायक नाना पटोले को आज को आज निर्विरोध अध्‍यक्ष चुन लिया
गया. यह विपक्षी दल बीजेपी के अपने कैंडिडेट की उम्‍मीदवारी वापस लेने के बाद हुआ. भाजपा प्रत्याशी किशन कथोरे के सुबह नामांकन वापस लेने के बाद कार्यवाहक अध्यक्ष दिलीप वालसे पाटिल ने यह एलान किया.  इसके बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और कुछ वरिष्ठ विधायक पटोले  को अध्यक्ष की पीठ तक ले गए. महाराष्‍ट्र के विदर्भ क्षेत्र से विधानसभा अध्‍यक्ष का पद संभालने वाले पटोले पहले नेता हैं.

पटोले ने भाजपा के हरीभाऊ बागड़े का स्थान लिया जो 2014 से 2019 के दौरान विधानसभा अध्यक्ष रहे थे. मुख्‍यमंत्री उद्धव ठाकरे और विपक्षी बीजेपी नेता व विधायक देवेंद्र फडणवीस ने नए स्‍पीकर पटोले को बधाई दी. 57 साल के पटोले चौथी बार विधायक बने हैं और एक बार सांसद रह चुके हैं. पटोले भंडारा जिले की साकोली विधानसभा का नेतृत्‍व कर रहे हैं.

विधानसभा में सीएम उद्धव ठाकरे ने ठाकरे ने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि एक किसान का बेटा इस पद पर आसीन हुआ है.  नाना पटोले भी एक किसान परिवार से आए हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि वह सभी को न्याय देंगे.

भाजपा विधायक दल के नेता देवेंद्र फडणवीस ने भी विधायक और किसान नेता के तौर पर पटोले के काम की तारीफ की.

 

राज्य विधानसभा में विपक्षी पार्टी भाजपा नेता देवेंद्र फड़णवीस ने कहा, हमने विधानसभा स्पीकर के पद के लिए किसान कथोरे को नामित किया था, लेकिन सर्वदलीय बैठक में, अन्य दलों ने हमसे अनुरोध किया और यह परंपरा रही है कि स्पीकर को निर्विरोध नियुक्त किया जाता है, इसलिए हमने अनुरोध स्वीकार कर लिया और अपने उम्मीदवार का नाम वापस ले लिया.

एनसीपी के मंत्री जयंत पाटिल ने कहा कि वह अपना उम्मीदवार वापस लेने और पटोले के निर्विरोध चुनाव में विपक्षी दल भाजपा द्वारा दिखाई समझदारी की भावना की सराहना करते हैं.

पटोले के निर्वाचन से विदर्भ क्षेत्र को पिछले दो दशकों में पहली बार अध्यक्ष का प्रतिष्ठित पद मिला है. पटोले हाल के विधानसभा चुनाव में फडणवीस के करीबी सहायक और राज्य के मंत्री रहे परिणय फुके को हराकर साकोली विधानसभा सीट से चौथी बार जीते हैं.

विदर्भ के भंडारा जिले में साकोली तहसील में 1962 में सरकारी अधिकारियों के परिवार में जन्मे पटोले ने नागपुर विश्वविद्यालय से 1987 में विश्वविद्यालय प्रतिनिधि के तौर पर राजनीति की शुरूआत की. वाणिज्य विषय में स्नातक करने के बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए और 1991 में भंडारा जिला परिषद के सदस्य बने.

पटोले 1999 में पहली बार विधानसभा पहुंचे और 2004 और 2009 में भी राज्य विधानसभा चुनाव जीते. पटोले ने कांग्रेस छोड़ दी और भाजपा के टिकट पर 2014 का लोकसभा चुनाव जीते.

नाना पटोले ने स्‍पीकर पद के लिए भरा नामांंकन

आज सत्र शुरू होने से पहले विपक्षी दल बीजेपी ने अपने कैंडिडेट की उम्‍मीदवारी वापस लेने का फैसला किया. इसके बाद कांग्रेस विधायक व महा विकास स अघाडी के उम्‍मीदवार नाना पटोले का विधानसभा अध्‍यक्ष के पद पर निर्विरोध चुने जाने का रास्‍ता तय हो गया था.

नाना पटोले का निर्विरोध विधानसभा अध्‍यक्ष बनना तय, बीजेपी ने उम्‍मीदवारी वापस ली

आज विशेष सत्र शुरू होने के पहले विधानसभा के प्रोटेम स्‍पीकर दिलीप वलसे पाटिल ने सभी दलों के नेताओं की बैठक बुलाई
थी. सत्‍तारूढ़ दलों और अन्‍य विधायकों ने अध्‍यक्ष का चुनाव निर्विरोध करने की बात कही, तो विपक्षी पार्टी भाजपा इस पर
तैयार हो गई और उसने अपने उम्‍मीदवार किसन कथोरे की वापसी की घोषणा कर दी थी.

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