मुंबई: शहरों के नाम बदलने का क्रम अब महाराष्ट्र में भी शुरू हो गया है. बीजेपी की सरकारें ऐसा करती आई हैं, लेकिन अब शिवसेना ने भी शहरों के नामकरण का काम शुरू कर दिया है. इसी क्रम में महाराष्ट्र के शहर औरंगाबाद का नाम बदला जा रहा है. कांग्रेस इसका विरोध कर रही है. कांग्रेस ने औरंगाबाद (Aurangabad) का नाम बदलने को लेकर अपना रुख एक बार फिर दोहाराया है. वहीं उसके सहयोगी दल शिवसेना (Shivsena) ने कहा कि नाम जल्द ही बदला जाएगा, लेकिन इससे महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार पर असर नहीं पड़ेगा.Also Read - Udaipur Tailor Kanhaiya Murder: NIA करेगी टेलर कन्हैया तेली के मर्डर की जांच, हत्या के बाद प्रदेशभर में तनाव

इससे पहले, महाराष्ट्र सरकार के मंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बालासाहेब थोराट ने दो दिन पहले कहा था कि वह मध्य महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर का नाम बदलकर संभाजीनगर रखने का पुरजोर विरोध करेंगे. थोराट ने कहा कि कांग्रेस छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति संभाजी महाराज के प्रति श्रद्धा रखती है और इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए, लेकिन शहर का नया नाम रखे जाने के मुद्दे का उपयोग नफरत फैलाने और समाज में विभाजन के लिए नहीं किया जाना चाहिए. Also Read - Curfew in Udaipur: उदयपुर में टेलर कन्हैया की हत्या के बाद कई इलाकों में कर्फ्यू, जानिए क्या रहेगा बंद और किन्हें मिलेगी छूट ?

हाल ही में औरंगाबाद के दौरे के दौरान थोराट ने कहा था कि शहर का नाम बदले जाने के किसी भी कदम का कांग्रेस विरोध करेगी.शिवसेना ने शनिवार को अपने मुखपत्र में कहा कि कांग्रेस ने औरंगाबाद का नाम बदलने के प्रस्ताव का विरोध किया, जिससे (विपक्षी) भाजपा खुश हो गई. संपादकीय में कहा गया है, कांग्रेस का प्रस्ताव का विरोध करना कोई नई बात नहीं है, लिहाजा इसे महा विकास अघाड़ी सरकार (एमवीए) से जोड़ना मूर्खता है. Also Read - उदयपुर में कन्हैया के मर्डर पर बोले राहुल गांधीः धर्म के नाम पर बर्बरता बर्दाश्त नहीं, आतंक फैलाने वालों को सख्त सजा मिले

संपादकीय में लिखा है, थोराट ने घोषणा की है कि अगर औरंगाबाद का नाम बदलने का कोई भी प्रस्ताव एमवीए सरकार के सामने आता है तो उनकी पार्टी इसका विरोध करेगी. यह उनका दावा है. उनके इस बयान के बाद भाजपा नेताओं ने शिवसेना से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग करना शुरू कर दिया है. लेकिन शिवसेना ने अपना रुख नहीं बदला है.

इस बीच, कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता एवं राज्य में मंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि शहर का नाम बदलना महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार की प्राथमिकता नहीं थी. चव्हाण ने कहा, यह तीन दलों की गठबंधन सरकार है और प्रत्येक दल का अपना अलग नजरिया है इसलिए हम सभी एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम के आधार पर साथ आए थे. नाम बदलना प्राथमिकता नहीं है. इससे पहले दिन में शिवसेना नेता संजय राउत ने भरोसा जताया कि गठबंधन सहयोगियों के साथ वार्ता के माध्यम से इस मुद्दे का हल निकाल लिया जाएगा.