मुंबई: महाराष्ट्र कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि गुजरात की भाजपा सरकार पर्याप्त संख्या में कोविड-19 जांच नहीं कर रही है और आंकड़ों को भी छिपा रही है. उल्लेखनीय है कि गुजरात उच्च न्यायालय ने दो दिन पहले विजय रूपाणी सरकार के उस फैसले पर सवाल उठाया था जिसमें निजी प्रयोगशालाओं को कोविड-19 जांच की अनुमति नहीं दी गई थी. कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या यह राज्य में कृत्रिम तरीके से कोरोना वायरस से संक्रमण के मामलों को नियंत्रित करने का तरीका है. Also Read - कांग्रेस का सवाल- भारतीय सेना LAC पर हमारी ही सरजमी से क्यों हट रही है पीछे, क्या पीएम मोदी के शब्दों के मायने नहीं?

महाराष्ट्र कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश की स्थिति भी लगभग ऐसी है. उन्होंने कहा कि इन राज्यों की सरकारों ने कोविड-19 के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है. Also Read - 'मैं महाराजा, टाइगर और मामा नहीं और न चाय बेचता हूं, मैं कमलनाथ हूं'

भाजपा नेताओं द्वारा कोरोना वायरस से संक्रमण की स्थिति को लेकर महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करने पर पलटवार करते हुए सावंत ने कहा कि महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार के प्रदर्शन पर बात करने से पहले वे ‘ गुजरात के असफल मॉडल’’ को देखें. Also Read - Coronavirus in Mumbai Update: महामारी ने मचाई आफत, मौत और संक्रमितों की संख्या चीन से अधिक

सावंत ने कहा, ‘‘ गुजरात में पर्याप्त संख्या में कोविड-19 जांच नहीं हो रही है और आंकड़ों को भी छिपाया जा रहा है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ गुजरात उच्च न्यायालय ने राज्य के स्वास्थ्य प्रणाली पर फटकार लगाई और अस्पतालों को कालकोठरी से भी बद्तर बताया. साथ ही उनकी तुलना ड्रबते टाइटेनिक जहाज से की.’’

सावंत ने आरोप लगाया, ‘‘ उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में भी कमोवेश यही स्थिति है और वहां की सरकारें कोरोना वायरस के समक्ष नतमस्तक हो गई हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘अहमदाबाद में कोविड-19 को लेकर सरकार के समक्ष पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता ने स्तब्ध करने वाले तथ्य रखे हैं. उन्होंने अदालत को बताया कि अधिक जांच करने पर 70 प्रतिशत आबादी कोरोना पॉजिटिव निकल सकती है. इससे लोगों में भय का माहौल बनेगा.’’

सावंत ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों की हालत को देखते हुए उसके नेताओं को महाराष्ट्र की स्थिति के बारे में बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वैज्ञानिक तरीके से कदम उठा रही है और वह ताली बजाने और दिया जलाने जैसी गतिविधियों में शामिल नहीं है. सावंत ने आरोप लगाया कि भाजपा सांसद नरायण राणे का राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग अचानक नहीं आई बल्कि यह केंद्र में भाजपा नेताओं की योजना का हिस्सा है.