नागपुर/मुंबई: कोरोना वायरस से संक्रमण को रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों की जांच के दौरान ‘ब्रेथ एनालाइजर’ उपकरणों के इस्तेमाल पर फिलहाल के लिये रोक लगा दी है. इस उपकरण से जांच के दौरान वाहन चालक की सांस के जरिये उसके रक्त में अल्कोहल की मात्रा का पता लगाया जाता है. स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य लोगों के बीच संपर्क के जरिए होने वाले वायरस के प्रसार को कम करना है. Also Read - Video: जुमे की नमाज के लिए मस्जिद में जुटे, मना करने पर भीड़ ने पुलिस टीम पर किया पथराव

उन्होंने कहा, ‘‘हमने फिलहाल के लिए ब्रेथ एनालाइजर उपकरणों का इस्तेमाल रोकने का फैसला किया है.’’ कोरोना वायरस संक्रमण के चलते मुम्बई के 64 वर्षीय एक व्यक्ति की मंगलवार को मौत हो गई, जो दुबई यात्रा पर गया था. महाराष्ट्र में कोविड-19 से मौत का यह पहला मामला है. राज्य में इस वायरस से संक्रमण के कुल 39 मामले सामने आये हैं. Also Read - Coronavirus: देश में आज सबसे ज्‍यादा 478 संक्रमण के मामले बढ़े, कुल आंकड़ा 2500 के पार

अधिकारी ने कहा कि पुलिस अधिकारियों की निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता को बरकरार रखने के लिए यह एक बहुत महत्वपूर्ण उपकरण है. हालांकि, वाहनों की पुलिस कर्मियों द्वारा लगातार जांच जारी रहेगी. इस सिलसिले में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी), महाराष्ट्र राजमार्ग पुलिस विनय करगांवकर ने सोमवार को एक परिपत्र जारी किया. उन्होंने कहा कि राज्य में कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए पुलिस कर्मियों को एहतियाती उपाय करने की जरूरत है. Also Read - निजामुद्दीन मरकज को खाली कराने वाली टीम में शामिल रहे दिल्‍ली पुलिस के 7 जवान छुट्टी पर भेजे गए

परिपत्र में कहा गया है, ‘‘इसलिए, सभी पुलिस इकाइयों में यातायात पुलिसकर्मियों को ‘ब्रेथ एनालाइजर’ जांच नहीं करनी चाहिए.’’ उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य होने के बाद यह जांच फिर से शुरू की जाएगी. पुलिस कर्मियों को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए महाराष्ट्र राजमार्ग पुलिस ने शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों की जांच पर फिलहाल रोक लगाने का फैसला लिया है क्योंकि यह जांच सांस से जुड़ी है.

करगांवकर ने नागपुर में बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है. इस बीच, गृह मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि शराब पीकर वाहन चलाने के मामलों की संख्या में कमी आई है लेकिन यह अब भी अधिक है. यह संख्या 2015 में 18,000 से घट कर 2018 में 11,700 हो गई.

(इनपुट भाषा)