ठाणे: स्थानीय जिला अदालत ने बारह साल की एक लड़की से दुष्कर्म के मामले में 25 वर्षीय एक मजदूर को बरी कर दिया क्योंकि अभियोजन पीड़िता को खोजने में विफल रहा. जिला और विशेष न्यायाधीश पी पी जाधव ने जनवरी 18 को अपने आदेश में कहा कि अभियोजन यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के तहत राजेंद्र निषाद के खिलाफ आरोप सिद्ध करने में नाकाम रहा. Also Read - India vs England ODI Series: भारत बनाम इंग्लैंड वनडे सीरीज में नहीं होंगे दर्शक, जानिए क्या है वजह

अतिरिक्त लोक अभियोजक विवेक कडु ने अदालत को बताया कि पीड़िता उत्तर प्रदेश के बेहसारिया की निवासी है और अपने पिता और बहन के साथ रहती थी. जीवन यापन करने के लिए वे शादी में गाते थे और भीख मांगते थे. कडु ने कहा कि पीड़िता मार्च 2015 में घर से भाग कर गोरखपुर मुंबई जाने वाली ट्रेन पर चढ़ गई थी. रास्ते में उसकी मुलाकात आरोपी और उसके परिवार से हुई. Also Read - लड़की का पीछा करने पर कोर्ट ने 24 साल के युवक को 22 महीने की कड़ी सजा सुनाई

निषाद की पत्नी ने पीड़िता से कहा कि वह उसे घर दिलाने में मदद करेगा जिसके बाद आरोपी ने पीड़िता को भिवंडी में एक फ्लैट में रखा और कथित तौर पर कई बार उसका बलात्कार किया. पीड़िता द्वारा पड़ोसी से इसकी जानकारी दिए जाने के बाद पीड़िता को शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस थाने ले जाया गया. थाने में आरोपी मौजूद था और उसने पीड़िता को धमकाया. Also Read - Mukesh Ambani Family को नहीं मिली कोई धमकी भरी चिट्ठी, मुंबई पुलिस ने विस्‍फोटक से लदी स्‍कॉर्पियो के मालिक की पहचान की

पीड़िता को पहले भिवंडी में बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के संरक्षण में रखा गया और बाद में उत्तर प्रदेश की बाल कल्याण समिति के पास भेज दिया गया था. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद अभियोजन पीड़िता को अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर पाया. अदालत ने यह भी पाया कि चिकित्सकीय साक्ष्य भी अभियोजन के आरोपों की पुष्टि नहीं करते हैं.