मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को लोगों से आग्रह किया कि वे कोरोना वायरस महामारी के चलते आगामी नवरात्रि एवं दशहरा त्योहार सादगी से मनायें. राज्य सरकार ने साथ ही सामूहिक भागीदारी वाले डांडिया, गरबा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बदले स्वास्थ्य एवं रक्तदान शिविरों का आयोजन करने का सुझाव दिया. राज्य के गृह विभाग की ओर से दिन में जारी दिशानिर्देशों के तहत त्योहार आयोजकों जिन्हें स्थानीय बोलचाल में मंडल भी कहा जाता है, से कहा गया कि वे कोविड-19, मलेरिया और डेंगू आदि बीमारियों के बारे में जागरुकता फैलाएं. Also Read - जल्द आने वाला है कोरोना का टीका! केंद्र ने राज्यों से कहा- सुचारु टीकाकरण के लिए समिति गठित करो

दिशानिर्देशों के अनुसार मंडलों द्वारा (नवरात्रि के दौरान) स्थापित की जाने वाली मां दुर्गा की प्रतिमा की ऊंचाई की सीमा चार फुट रखी गई है जबकि घरों में स्थापित की जाने वाली प्रतिमाओं की ऊंचाई दो फुट रखी गई है. साथ ही सामान्य समय में होने वाले विसर्जन जुलूस, भीड़भाड़ की इजाजत नहीं दी गई है. Also Read - मुंबई: रात में वेब-सीरीज देख रहा था 18 साल का लड़का, बि‍ल्‍डिंग गिरते देख बचा ली 75 लोगों की जान

इसमें यह भी सुझाव दिया गया है कि श्रद्धालु इस बार धातु की प्रतिमाओं का चयन करें तथा स्थानीय केबल नेटवर्क, स्ट्रीमिंग एवं सोशल मीडिया के जरिये डिजिटल दर्शन करें. इसमें मंडलों को निर्देश दिया गया है कि पंडाल में थर्मल स्क्रीनिंग का इंतजाम करें और पंडालों की साफ-सफाई की जानी चाहिए. सरकार ने कहा कि दर्शन के आकांक्षी श्रद्धालुओं को सामाजिक दूरी का पालन करना चाहिए और मास्क पहनना चाहिए. Also Read - Video: ईद ए मिलादुन्नबी के जुलूस में उड़ीं कोरोना गाइड लाइंस की धज्जियां, 10 की जगह पहुंचे सैकड़ों लोग

सरकार ने कहा कि विसर्जन नगर निगमों, हाउजिंग सोसाइटी, जनप्रतिनिधियों और एनजीओ की मदद से बनाये गए कृत्रिम तालाबों में किया जाना चाहिए. वहीं घर के स्तर पर पर्यावरण अनुकूल मिट्टी की प्रतिमाओं को विसर्जित किया जाना चाहिए. इसमें कहा गया है कि निषिद्ध क्षेत्रों से घरों की और सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित प्रतिमाओं के विसर्जन की अनुमति नहीं है.

दिशानिर्देशों के अनुसार पारंपरिक दशहरा कार्यक्रम में रावण का पुतला दहन सामाजिक दूरी के नियम का पालन करते हुए बिना दर्शकों के और प्रतिकात्मक रूप में किया जाना चाहिए. सरकार ने कहा, ‘‘दर्शकों को आमंत्रित नहीं किया जाना चाहिए. (आयोजकों को) फेसबुक जैसे सोशल मीडिया मंचों का इस्तेमाल करते हुए सीधे प्रसारण का इंतजाम करना चाहिए.’’

(इनपुट भाषा)