पुणे: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कोरेगांव भीमा युद्ध की 202वीं बरसी पर बुधवार को यहां ‘जय स्तंभ’ पर श्रद्धांजलि दी. युद्ध की बरसी पर श्रद्धांजलि देने के लिए कोरेगांव भीमा गांव के समीप ‘जय स्तंभ’ स्मारक पर हर साल लाखों लोग आते हैं. यह लड़ाई ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठा साम्राज्य के पेशवा धड़े के बीच एक जनवरी 1818 को लड़ी गई थी. Also Read - लॉकडाउन के बीच शख्स ने पूछा गर्लफ्रेंड से मिलने का तरीका, मुंबई पुलिस के क्यूट जवाब ने जीता लोगों का दिल

पवार ने ट्वीट कर लिखा, ”आज भीमा कोरेगांव स्‍थल पर पहुंचा. एक जनवरी 1818 को इस जगह पर हुई लड़ाई में महार रेजिमेंट का युद्ध रेजिमेंट, जिसने वीरता हासिल की और अद्वितीय वीरता के साथ जीता. उनकी स्‍मृति में विजय सभा को पुष्पांजलि अर्पित कर वीर शहीद को सलामी दी.” Also Read - Fire At Covid Hospital in Maharashtra : वसई में कोविड अस्‍पताल में आग लगी, 13 कोरोना मरीजों की मौत

कोरेगांव भीमा युद्ध को एक जनवरी 2018 को 200 साल पूरे होने के मौके पर हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे. एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने किसी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं. Also Read - Maharashtra Coronavirus Updates 22 April: महाराष्ट्र में कोविड-19 के 67,013 नए मामले सामने आए, 568 लोगों की मौत

जय स्तंभ पर जाने के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत में पवार ने कहा कि वह महाराष्ट्र के लोगों की ओर से श्रद्धांजलि देने आए हैं. डिप्‍टी सीएम ने कहा, ”इस स्तंभ का इतिहास है और हर साल लाखों लोग यहां आते हैं. दो साल पहले कुछ अप्रिय घटनाएं हुई थी, लेकिन सरकार अत्यधिक सतर्कता बरत रही है और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए व्यापक पुलिस बंदोबस्त किए गए हैं.”

पवार ने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से युद्ध स्मारक पर जाने के लिए कहा. एनसीपी नेता ने कहा, ”मैं लोगों से यहां आने और श्रद्धांजलि देने की अपील करता हूं, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से आएं और अफवाहों पर भरोसा न करें.”

वंचित बहुजन अघाडी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर प्रकाश आंबेडकर ने भी जय स्तंभ पर श्रद्धांजलि दी.

ब्रिटिशों ने युद्ध में शहीद हुए लोगों की याद में पुणे-अहमदनगर रोड पर पेर्ने गांव में यह स्मारक बनवाया था. दलित नेता ब्रिटिश जीत का जश्न मनाते हैं, क्योंकि महार समुदाय के सैनिक ईस्ट इंडिया कंपनी के बलों का हिस्सा थे. इस युद्ध में ब्राम्‍हण पेशवा हारे थे.