मुंबई: भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने अभिनेता एवं नाट्य कला शिक्षक योगेश सोमन के खिलाफ की गई मुंबई विश्वविद्यालय की कार्रवाई को निरस्त करने की शुक्रवार को मांग की. कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना करने को लेकर विश्वविद्यालय ने सोमन के खिलाफ कार्रवाई की है. फडणवीस ने कहा कि विनायक दामोदर सावरकर की प्रशंसा करने वाले व्यक्ति के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की उम्मीद नहीं थी जब ‘मुख्यमंत्री खुद सावरकर की विचारधारा में यकीन करते हैं. Also Read - जम्मू में जुटे ‘ग्रुप ऑफ 23’ के नेता, कांग्रेस बोली- चुनावी राज्यों में प्रचार कर अपनी पार्टी के प्रति निष्ठा दिखाएं

विश्वविद्यालय के नाट्य कला अकादमी के निदेशक सोमन को वीडियो पोस्ट के जरिए राहुल गांधी की आलोचना करने के बाद अनिवार्य छुट्टी पर भेज दिया गया था. सोमन ने दिल्ली की रैली में गांधी द्वारा की गई एक टिप्पणी को लेकर उनकी आलोचना की थी जिसमें गांधी ने कहा था कि उनका नाम राहुल गांधी है, “राहुल सावरकर नहीं”, इसलिए वह “रेप इन इंडिया” की अपनी टिप्पणी पर माफी नहीं मांगेंगे. Also Read - West Bengal Assembly Elections 2021 Opinion Poll: बंगाल में फिर एक बार ममता सरकार! लेकिन 3 से 100 पर पहुंच सकती है भाजपा; जानिए क्या है जनता का मूड

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे पत्र में फडणवीस ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सोमन को हिंदुत्व विचारक एवं स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की प्रशंसा के लिए सजा दी गई. पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में महाराष्ट्र विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “मैं आपसे हस्तक्षेप करने और योगेश सोमन के खिलाफ कार्रवाई को वापस लेने की अपील करता हूं.” उन्होंने कहा, “इस कार्रवाई ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या किसी को बाबा साहेब आंबेडकर, महात्मा गांधी और वीर सावरकर जैसे आदर्श व्यक्तियों की प्रशंसा करनी चाहिए या नहीं.” Also Read - बीजेपी ने काउंटर नारे से ममता बनर्जी पर साधा निशाना, कहा- बंगाल को अपनी बेटी चाहिए, बुआ नहीं

फडणवीस ने कहा, “सोमन ने सावरकर की प्रशंसा की और एनएसयूआई (कांग्रेस की छात्र इकाई) ने उसके खिलाफ प्रदर्शन किया. छात्र अपना प्रदर्शन वापस ले लें इसलिए विश्वविद्यालय ने सोमन को अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया. इस कार्रवाई से राष्ट्रवादी दुखी हैं.” भाजपा नेता ने कहा, “सावरकर की विचारधारा में यकीन रखने वाले मुख्यमंत्री के शासन में ऐसी सजा की उम्मीद नहीं की जा सकती. यह सजा किसी राजनीतिक दवाब में आए बिना रद्द की जानी चाहिए.”