नई दिल्‍ली: महाराष्‍ट्र में बीजेपी-शिवसेना के बीच तकरार के बाद नरमी के मिल रहे रुख के बीच गुरुवार को मुंबई में महायुति की सदस्‍य शिवसेना के विधायकों की पार्टी मुख्‍यालय में मीटिंग में हुई पार्टी सुप्रीमो उद्धव ठाकरे की प्रमुख मौजूदगी में बैठक में पार्टी सरकार बनाने को लेकर अगले कदम की रणनीति तैयार की है. पार्टी ने एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता चुना है. वहीं, पार्टी के विधायक आदित्‍य ठाकरे ने इस प्रस्‍ताव को रखा, जिसे सर्वसम्‍मति से मान लिया गया. शिंदे के विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद शिवसेना के अगले कदम पर सभी की निगाहें लगी हुई हैं.

इसके साथ ही सुनील प्रभु को शिवसेना का मुख्य सचेतक चुना गया. मीटिंग होने के बाद सामने आए शिवसेना के नेताओं के रुख एक बार फिर कड़े दिखाई दे रहे हैं. शिवसेना सांसद संजय राउत ने बीजेपी के प्रति उनकी पार्टी के रुख में नरमी की खबरों को अफवाह बताया है. राउत ने कहा है कि शिवसेना के इस रुख में नरमी के लेकर मीडिया के एक वर्ग में आईं खबरें अफवाह हैं. भाजपा और शिवसेना के बीच जो कुछ भी तय हुआ था वह होगा.

पड़ोसी ठाणे से विधायक शिंदे पूर्ववर्ती कार्यकाल में भी सदन के नेता थे. वह इसके साथ ही भाजपा-शिवसेना सरकार में कैबिनेट मंत्री भी थे. पहली बार विधायक चुने गए आदित्य ठाकरे ने शिंदे के नाम का प्रस्ताव रखा. प्रताप सरनाइक ने प्रस्ताव का समर्थन किया.

शिवसेना के आदित्‍य ठाकरे समेत सभी विधायक राज्‍यपाल से  शाम में 6:15 बजे मिलने जाएंगे. आदित्य ठाकरे, एकनाथ शिंदे, दिवाकर राउते और सुभाष देसाई सहित शिवसेना नेता महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात करेंगे.

शिवसेना सूत्रों ने कहा कि पार्टी प्रमुख और आदित्य ठाकरे के पिता उद्धव ठाकरे अपने बेटे को शिवसेना विधायक दल का नेता बनाए जाने के इच्छुक नहीं थे. दादर स्थित शिवसेना मुख्यालय में आयोजित इस बैठक में उद्धव ठाकरे भी मौजूद थे.

इस बैठक में कुछ निर्दलीय विधायक भी उपस्थित थे, जिन्होंने 21 अक्टूबर को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में सत्ता बंटवारे को लेकर भाजपा और शिवसेना के बीच खींचतान जारी रहने के बीच शिवसेना को समर्थन की घोषणा की है.

शिवसेना ने विधानसभा चुनाव में 56 सीटें जीती हैं, जबकि भाजपा ने 105 सीटें जीती हैं. उद्धव ठाकरे नीत पार्टी ने दावा किया है कि सात निर्दलीय विधायक उसका समर्थन कर रहे हैं.

बता दें कि सत्ता के बंटवारे को लेकर शिवसेना-भाजपा के बीच कई दिनों से चल रही खींचतान के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को कहा था कि गठबंधन के सहयोगी जल्द ही मिलकर राज्य में सरकार बनाएंगे.

वहीं, विधायकों की शिवसेना सांसद व प्रवक्‍ता संजय राउत ने सरकार के गठन में 50-50 फार्मूले पर कहा, हम अपने स्‍टैंड से पीछे नहीं हटेंगे. अगर कोई अपने वादे से हटा है तो वह हमारा गठबंधन का सहयोगी है. हम अपनी मांगों के साथ आगे बढ़ते रहेंगे.

वहीं, महायुति में अन्‍य सहयोगी आरपीआई के नेता रामदास अठावले ने गुरुवार को कहा, महायुति (बीजेपी-शिवसेना गठबंधन) को स्‍पष्‍ट बहुमत मिला है. कल देवेंद्र फडनवीस को बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया था. हमने मुख्‍यमंत्री के पर के लिए उनके नाम का समर्थन करना तय किया है क्‍योंकि हमारे सामने केवल वही फ्रंट रनर हैं.

बीजेपी विधायक दल के नेता चुनने के बाद जब बुधवार को मुख्यमंत्री ने कहा था गठबंधन के सहयोगी जल्द ही मिलकर राज्य में सरकार बनाएंगे. इसके बाद शिवसेना के अपनी मांगों को लेकर रुख नरम होने का संकेत दिया था. शिवसेना नेता संजय राउत ने एक दिन पहले कहा था कि महाराष्ट्र के व्यापक हित में सम्मान से समझौता किए बगैर पार्टी के लिए भाजपा नीत गठबंधन में बने रहना जरूरी है. व्यक्ति महत्वपूर्ण नहीं हैं, लेकिन राज्य का हित महत्वपूर्ण है. शांत तरीके से और राज्य के हित को
ध्यान में रखकर फैसला करने की जरूरत है.  (एजेंसी: इनपुुट