मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की

महाराष्‍ट्र के आईपीएस ने इससे पहले सुप्रीकोर्ट में गृह मंत्री अनिल देशमुख के कथित भ्रष्टाचार की सीबीआई से जांच कराने के लिए याचिका लगाई थी

Published: March 25, 2021, 3:00 PM IST

Former Mumbai Police Commissioner, Param Bir Singh,  Bombay High Court, CBI inquiry , Anil Deshmukh, Mumbai, News: मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त (Former Mumbai Police Commissioner) (परमबीर सिंह Param Bir Singh) ने आज गुरुवार को बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) में एक याचिका दायर की है, जिसमें अपनी याचिका में अपने ट्रांसफर को चुनौती दी और महाराष्ट्र (Maharashtra)के गृह मंत्री अनिल देशमुख (Home Minister Anil Deshmukh) के खिलाफ सीबीआई जांच (CBI inquiry) की मांग की है. 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी सिंह ने खुद को मुंबई के पुलिस आयुक्त पद से हटाए जाने के आदेश को रद्द करने का सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था और कहा था कि यह आदेश मनमाना और गैर कानूनी है.

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त ने सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court) से अनुमति मिलने कल अपनी याचिका शीर्ष कोर्ट से वापस ले ली थी. सुप्रीम कोर्ट ने कल बुधवार को आईपीएस अफसर परमबीर सिंह की याचिका में महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ उठाए गए मुद्दे को अत्यंत गंभीर बताते हुए सिंह को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी थी.


मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्‍नर ने अपनी इस याचिका में उन्होंने अनिल देशमुख के कथित भ्रष्टाचार एवं कचादार की सीबीआई से निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराए जाने का निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया था. इस दौरान वकील के माध्‍यम से यह भी कहा कि सीसीटीवी फुटेज के रूप में सबूत हैं, जो एटीएस के कब्जे में हैं, जिसने इन्हें राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को नहीं सौंपा है.

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आईपीएस के वकील मुकल रोहतगी से कहा था कि दो प्राथमिक सवाल हैं-पहला यह कि अनुच्छेद 32 के तहत शीर्ष अदालत में याचिका क्यों दायर की गई है और याचिकाकर्ता ने अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय से संपर्क क्यों नहीं किया. दूसरा सवाल यह है कि सिंह ने अपनी याचिका में राज्य के गृह मंत्री को पक्ष क्यों नहीं बनाया है. रोहतगी ने कहा कि वह देशमुख को मामले में पक्ष बनाएंगे और इस संबंध में आवेदन तैयार है. उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है जिसने राज्य के प्रशासन को प्रभावित किया है. पीठ ने कहा कि अदालत का मत है कि याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय से संपर्क करना चाहिए और यदि वह मामले में किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच चाहते हैं तो उच्च न्यायालय इस मुद्दे को देख सकता है.

बता दें कि एनआई उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर के बाहर 25 फरवरी को मिली एसयूवी से संबंधित मामले की जांच कर रही है जिसमें विस्फोटक सामग्री रखी थी.

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