नई दिल्ली: महाराष्ट्र के राज्यपाल विद्यासागर राव ने राज्य में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में मराठों के लिए 16 फीसदी आरक्षण का प्रावधान करने वाले विधेयक को शुक्रवार को मंजूरी दे दी. राजभवन के एक सूत्र ने यह जानकारी दी. यह विधेयक राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों ने गुरुवार को सर्वसम्मति से पारित कर दिया था. ऐसा कर इस समुदाय की काफी समय से लंबित यह मांग पूरी की गई थी. सूत्र के मुताबिक राज्यपाल ने इस विधेयक को मंजूरी प्रदान कर दी है. राज्य की आबादी में मराठा समुदाय करीब 33 फीसदी (लगभग 13 करोड़) है. Also Read - Reservation for Kashmiri Pandits: AICTE का बड़ा फैसला, कश्मीरी पंडित या घाटी के हिंदू परिवारों को कॉलेज एडमिशन में मिलेगा आरक्षण 

Also Read - मराठा आरक्षण पर बोले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, 'रोक हटवाने के लिए उठाएंगे कदम'

सरकारी नौकरियों और शिक्षा में मराठाओं के लिए 16 प्रतिशत आरक्षण का बिल महाराष्ट्र विधानसभा में पास Also Read - हरियाणा में प्राइवेट कंपनियों में अब राज्य के ही लोगों को नौकरी मिलना होगा आसान, अध्यादेश को मंजूरी

दूसरी ओर मराठा समुदाय को आरक्षण दिए जाने पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) संगठन ने कहा है कि वह इसे अदालत में चुनौती देगा. हालांकि महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि मराठा समुदाय को दिए गए आरक्षण से मौजूदा आरक्षण पर कोई असर नहीं पड़ेगा.पनवेल-उरान अगड़ी समाज मंडल और ओबीसी संघर्ष समन्वय समिति के उपाध्यक्ष जे डी टंडेल ने कहा कि मराठा समुदाय को मिला आरक्षण मौजूदा आरक्षण को निश्चित तौर पर प्रभावित करेगा. इसलिए हमने अदालत जाने का फैसला किया है.

BSP के पक्ष फिजा बनाने में जुटे भीम आर्मी चीफ ने कहा- मुसलमानों को समझना होगा, उनका हित किसके साथ

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने शुक्रवार को विधानसभा को बताया कि जिन लोगों को लगता है कि मुसलमानों में ऐसी जातियां हैं जिन्हें आरक्षण मिलना चाहिए तो वे राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (एसबीसीसी) से संपर्क कर उससे सर्वेक्षण के लिये अनुरोध कर सकते हैं. फड़णवीस ने विधानसभा में कहा कि आरक्षण जाति के आधार पर दिया जाता है और मुसलमानों व ईसाइयों में कोई जाति व्यवस्था नहीं है. उन्होंने कहा, ‘मुसलमानों में कुछ पिछड़ी जातियां हैं क्योंकि उन्होंने हिंदूत्व से धर्मांतरण के समय अपनी जाति बरकरार रखी थी.अभी मुसलमानों में 52 पिछड़ी जातियों को आरक्षण दिया गया है.

मराठा आरक्षण: महाराष्ट्र सरकार ने कहा, सर्वे के बाद SBCC ने सौंपी थी रिपोर्ट, हिंसा रोकने के लिए पुलिस ने की थी कार्रवाई

फड़णवीस ने कहा, ‘जिन लोगों को लगता है कि मुसलमानों में ऐसी और जातियां है जिन्हें आरक्षण की जरूरत है तो वे सर्वेक्षण कराने के लिए एसबीसीसी से संपर्क कर सकती हैं. एसबीसीसी की सिफारिशें सरकार के लिये बाध्यकारी होंगी.’ उन्होंने आश्वासन दिया कि वह विधायक दल के नेताओं की एक बैठक बुलाएंगे जिससे उन लोगों के परिवार की मदद का कोई तरीका खोजा जा सके जिन्होंने मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान खुदकुशी की थी. फड़णवीस ने कहा, ‘समाज में ऐसा संदेश नहीं जाना चाहिए कि मुद्दों के निस्तारण या हल के लिए खुदकुशी करना एक विकल्प है.

शिवसेना MLA ने मराठा आरक्षण आंदोलन के समर्थन में इस्तीफा दिया, BJP प्रदेश अध्यक्ष के हैं दामाद

काकासाहेब शिंदे ने घोषणा की कि वह जल समाधि लेंगे. पुलिस को उन्हें बचाना चाहिए था लेकिन दुर्भाग्य से यह हो नहीं सका. इसलिये हम उनके परिवार की मदद की जिम्मेदारी लेते हैं.’उन्होंने कहा कि आरक्षण आंदोलन के सिलसिले में प्रदेश भर में मराठा युवकों के खिलाफ 543 मामले दर्ज हैं, जिनमें से 66 वापस ले लिये गए हैं. फड़णवीस ने कहा, ‘इनमें से 46 मामले गंभीर थे और इन्हें वापस नहीं लिया जा सकता. 65 मामले वापस लेने के संबंध में अंतिम फैसला किया जा चुका है. 314 मामलों की वापसी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.