Rakesh Tikait, Govt of India, MSP, Mumbai, News: मुंबई: भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश ने आज रविवार को केंद्र सरकार को सरेआम चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार अपने दिमाग ठीक करके एमएसपी पर कानून बना दें. नहीं तो हम वोई के वोई हैं. 26 जनवरी कोई दूर नहीं है फिर. ये 26 जनवरी भी यहीं और ये देश का चार लाख ट्रैक्‍टर भी यहीं भी है. देश के किसान भी यहीं है. अपने दिमाग ठीक करके बात कर लें.Also Read - Republic Day 2022: इतिहास में पहली बार, आधा घंटा देरी से शुरू होगी गणतंत्र दिवस परेड | जानिए वजह

किसान नेता राकेश टिकैत ने यह बात मुंबई में मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए कही है. न्‍यूज एजेंसी एएनआई ने यह वीडियो जारी किया है. इसमें राकेश टिकैत मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए कहते नजर आ रहे हैं कि …” भाई आप जिसे नहीं समझा पाए, आप हमें आतंकवादी घोषित करके जेल में डाल दो. हम एक समूह हैं, हमें आतंकवादी घोषित करके. हमने अपनी बात उठाई, हमको घोषित करके जेल में डाल दें. टिकैत ने कहा, वे अपने दिमाग ठीक कर ले भारत सरकार, जो गुंडागिर्दी करना चाहते हैं, गुंडागर्दी उनकी नहीं चलेगी. बहुत झेल लिया किसान ने एक साल. अपने दिमाग ठीक करके एमएसपी पर कानून बना दें. नहीं तो हम वोई के वोई हैं. 26 जनवरी कोई दूर नहीं है फिर. ये 26 जनवरी भी यहीं और ये देश का चार लाख ट्रैक्‍टर भी यहीं भी है. देश के किसान भी यहीं है. अपने दिमाग ठीक करके बात कर लें. Also Read - Driving Licence: मुंबई में अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना होगा आसान! RTO में इस पहल की हो रही शुरुआत

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बता दें कि मुंबई में संयुक्त शेतकरी कामगार मोर्चा (एसएसकेएम) के बैनर तले आजाद मैदान में आयोजित ‘किसान महापंचायत’में हिस्सा लेने आये टिकैत ने कहा, भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने रविवार को मांग की कि केंद्र देश में किसानों के हितों की रक्षा के लिए फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी के लिए एक कानून लाए.

टिकैत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एमएसपी के समर्थक थे, जब वह गुजरात मुख्यमंत्री थे और वह किसानों के हितों की गारंटी सुनिश्चित करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी कानून चाहते थे. उन्होंने मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर इस मुद्दे पर बहस से भागने का आरोप लगाया.

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा, केंद्र को किसानों को एमएसपी की गारंटी देने के लिए एक कानून लाना चाहिए. कृषि और श्रम क्षेत्रों से जुड़े कई मुद्दे हैं, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है और हम उन्हें उजागर करने के लिए पूरे देश में यात्रा करेंगे. टिकैत ने यह भी मांग की कि केंद्र के तीन कृषि विपणन कानूनों के खिलाफ साल भर के विरोध प्रदर्शन में जान गंवाने वाले किसानों के परिजनों को वित्तीय सहायता दी जाए.

बता दें कि इस महीने की शुरुआत में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के सरकार के फैसले की घोषणा की थी, जो किसानों के विरोध के केंद्र में थे. कई किसान तीन कृषि कानूनों- कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) कानून, कृषि (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून और आवश्यक वस्तु संशोधन कानून, 2020- के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर नवंबर 2020 से ही प्रदर्शन कर रहे हैं. केंद्र ने प्रदर्शनकारी किसानों के साथ कई दौर की बातचीत की थी. उसका कहना था कि कानून किसानों के हित में हैं, जबकि प्रदर्शनकारियों का दावा था कि कानूनों के कारण उन्हें कॉर्पोरेट घरानों की दया पर छोड़ दिया जाएगा.