Remdesivir Shortage: बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने मंगलवार (27 अप्रैल, 2021) को केंद्र सरकार से पूछा कि निजी व्यक्ति दवा कंपनियों से सीधे कोरोना वायरस की दवाओं की खरीद कैसे कर पा रहे हैं. ऐसा तब है जब कंपनियों को अपना पूरा उत्पादन केंद्र को देना जरूरी है जो राज्यों को दवाईयां वितरित करने में सक्षम बनाता है.Also Read - 'होठों को चूमना, प्यार से छूना अप्राकृतिक अपराध नहीं', बॉम्बे हाईकोर्ट ने यौन शोषण के आरोपी को दी जमानत....

चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता (Chief Justice Dipankar Datta) और जस्टिस गिरीश एस कुलकर्णी (Justice Girish S Kulkarni) की डिवीजन बेंच ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान ये टिप्पणी की. याचिका वकील स्नेहा मरजदी की दाखिल की थी. इसमें उन्होंने प्रदेश में कोविड-19 के हालात में अनुचित प्रबंधन के आरोप लगाए. उन्होंने रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की कमी के संबंध में दिशा-निर्देश भी मांगे. Also Read - बंबई हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, दुष्कर्म पीड़िता को गर्भपात की इजाजत देने से इनकार, राज्य सरकार को दिए ये आदेश

कोर्ट ने अहमदनगर के सासंद द्वारा दिल्ली से रेमडेसिविर की दस हजार से अधिक शीशियां खरीदने और इनके कथित वितरण पर भी संज्ञान लिया. कोर्ट ने बताया कि उसकी औरंगाबाद बेंच ने सोमवार को पहले इस संबंध में संज्ञान लिया है. मालूम हो कि पिछले सप्ताह अहमदनगर से भाजपा सांसद डॉक्टर सुजय विखे पाटिल रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदे और इनका वितरण किया. Also Read - भारत में आएगी कोरोना की चौथी लहर? इस आईआईटी प्रोफेसर ने किया है ये दावा-जानिए क्या कहा

मंगलवार को इस संबंध में कोर्ट ने केंद्र के वकील से पूछा- एक चार्टर्ड विमान द्वारा दिल्ली से एयरलिफ्ट करके दस हजार शीशियों को कैसे उपलब्ध कराया जा सकता है? क्या यह निजी वितरण नहीं है? दिल्ली खुद संकट में है। जस्टिस गिरीश एस कुलकर्णी ने आगे कहा कि हम चाहते हैं कि दवा हर किसी जरुरतमंद तक पहुंचे. ये सिर्फ कुछ लोगों की पहुंच ना हो.

सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि गया कि अहमदनगर की घटना को अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए. ऐसे कई और निजी लोग थे जो इस दवा की खरीद कर रहे थे.