नई दिल्‍ली: महाराष्‍ट्र में विधानसभा चुनाव के बीजेपी से मुख्‍यमंत्री की कुर्सी के लिए गठबंधन तोड़ने वाली शिवसेना क्‍या एनसीपी और कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनाकर भी उनके साथ खुश नहीं है? यह सवाल मंगलवार को शिवसेना के एक सीनियर नेता के ताजा बयान से उठ खड़ा हुआ है. आज महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना नेता मनोहर जोशी ने कहा है कि उनकी राय में बीजेपी और शिवसेना एक साथ रहें तो बेहतर होगा, लेकिन दोनों दल वर्तमान में यह नहीं चाहते हैं.

जोशी का यह बयान उस समय आया, जब शिवसेना ने नागरिक संसोधन विधेयक 2019 का लोकसभा में समर्थन किया. हालांकि इसके बाद पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राज्‍यसभा में समर्थन के लिए बीजेपी के सामने कुछ शर्तें रख दी हैं. उन्होंने कहा, हमने कुछ सवाल उठाए हैं, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिए हैं. यह एक भ्रांति है कि सिर्फ भाजपा को देश का खयाल है.

पार्टी के सीनियर नेता जोशी ठाकरे परिवार के सबसे करीबी नेताओं में से हैं. बीजेपी और शिवसेना के एक साथ होने की निजी राय देने वाले पूर्व सीएम जोशी को क्‍या ऐसा लगता है कि कांग्रेस और एनसीपी के साथ उनकी पार्टी ज्‍यादा दिन तक सरकार नहीं चल पाएगी या संभावित गतिरोधों की आशंका के चलते उनका यह बयान आया है.

बता दें कि महाराष्‍ट्र में सरकार बनने के बाद अभी तक तीनों दलों के मंत्रियों के विभागों का बंटवारा भी नहीं हो सका है. वहीं, कई शिवसेना विधायकों की नाखुशी की खबरें भी चर्चा में हैं. ये विधायक अपनी परंपरागत विरोधी पार्टियों कांग्रेस और एनसीपी से गठबंधन करने के खिलाफ बताए जा रहे हैं. पार्टी सुप्रीमों इन विधायकों को अपने विश्‍वास में लेने की कोशिश करते हुए माने जा रहे हैं.

लोकसभा ने सोमवार को इस विधेयक को पारित कर दिया है. शिवसेना ने निचले सदन में विधेयक का समर्थन किया है. जबकि महाराष्‍ट्र की सत्‍ता में उसकी सहयोगी कांग्रेस और एनसीपी मुख्‍य रूप से इस विधेयक के विरोध में खड़ी हैं. अब शिवसेना ने अपने रुख में थोड़ा बदलाव लिए हुए दिख रही है. उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि शिवसेना राज्यसभा में तब तक विधेयक का समर्थन नहीं करेगी, जब तक कि पार्टी द्वारा लोकसभा में उठाए गए सवालों का जवाब नहीं मिल जाता है. शायद ठाकरे ऐसा करके कुछ हद तक कांग्रेस और एनसीपी की अंदरूनी नाजगी को रोकने के लिए करना चाहते हैं. हालांकि दोनों ने दलों ने शिवसेना के इस कदम पर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी है.

उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि हमें इस धारणा को बदलना होगा कि इस विधेयक और भाजपा का समर्थन करने वाले देशभक्त हैं और जो इसका विरोध कर रहे हैं वो राष्ट्र-द्रोही हैं. विधेयक को लेकर उठाए गए सभी मु्द्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए.

भाजपा पर निशाना साधते हुए ठाकरे ने उम्मीद जताई कि भारत में शरण मांगने वालों और इस विधेयक के दायरे में आने वालों को अब अधिक प्याज मिलेगा. ठाकरे ने कहा कि भाजपा को लगता है कि जो कोई (इससे) असहमत है, वह देशद्रोही है.

ठाकरे ने कहा कि शिवसेना ने जिन संशोधनों का सुझाव दिया है, उन्हें राज्यसभा में पेश किए जाने वाले विधेयक में शामिल करना चाहिए. उन्होंने कहा, ये शरणार्थी कहां रुकेंगे, किस राज्य में. यह सबकुछ स्पष्ट होना चाहिए. उन्‍होंने कहा कि मोदी सरकार को इस विधेयक को लागू करने से अधिक अर्थव्यवस्था, नौकरी संकट और बढ़ती महंगाई पर चिंतित होना चाहिए.