नई दिल्ली: माओवादियों से संबंध रखने के आरोप में नजरबंद मानवाधिकार कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज ने कॉमरेड प्रकाश को पत्र लिखने के महाराष्ट्र पुलिस के दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह पत्र पूर्ण रूप से मनगढ़ंत है और उन्हें और अन्य मानवाधिकार संगठनों को अपराधी बताने की साजिश है. शुक्रवार को मीडिया ब्रीफिंग में पुलिस ने जनवरी में हुई भीमा-कोरेगांव हिंसा के संबंध में जून में गिरफ्तार किए गए कुछ कार्यकर्ताओं से जुड़े जब्त किए गए पत्रों की जानकारियां जारी की थी. पुलिस ने दावा किया था कि भारद्वाज ने किसी कॉमरेड प्रकाश नाम के व्यक्ति को पत्र लिखा है. बता दें किइस सप्ताह की शुरुआत में पुलिस ने पांच कार्यकर्ताओं के घरों पर छापा मारा था. Also Read - Chhattisgarh: माओवादियों ने कहा, लापता जवान हमारे कब्‍जे में हैं, हम सरकार से बातचीत के लिए तैयार, मध्‍यस्‍थों की घोषणा करें

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इस पर नजरबंद चल रही भारद्वाज ने हाथ से लिखकर एक बयान में शुक्रवार को प्रतिक्रिया दी कि पुणे पुलिस द्वारा दिखाया गया पत्र मनगढ़ंत है. उन्होंने दावा किया कि मानवाधिकार वकीलों, कार्यकर्ताओं और संगठनों पर जानबूझकर लांछन लगाया जा रहा है, उनके काम में रुकावट डाली जा रही है और लोगों में ऐसे कार्यकर्ताओं के प्रति घृणा को भड़काया जा रहा है.

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यह पत्र पूर्णरूप से मनगढ़ंत है

बयान में सुधा भारद्वाज ने कहा है, ”यह पत्र पूर्णरूप से मनगढ़ंत है और मुझे और अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, संगठनों और वकीलों को अपराधी बताने के लिए ऐसा किया जा रहा है.’ मानवाधिकार कार्यकर्ता-वकील ने कहा कि उन्हें पुणे ले जाने से पहले इस मनगढ़ंत पत्र को न तो पुणे की अदालत में दिखाया गया और न ही फरीदाबाद के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को दिखाया गया.

महाराष्ट्र पुलिस का दावा, कुछ कार्यकर्ताओं ने की थी विदेशों में बैठक

महाराष्ट्र पुलिस ने शुक्रवार को कहा कि माओवादियों के साथ संबंध रखने के संदेह में गिरफ्तार किए गए कुछ वामपंथी कार्यकर्ताओं ने विदेशों में बैठकें की थीं और वे वहां विभिन्न संगठनों के संपर्क में थे.

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 पत्रों में फ्रांस और अमेरिका में दार्शनिकों की बैठकों का जिक्र

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) परमबीर सिंह ने बताया था कि जून और इस हफ्ते गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं से मिले पत्रों में पेरिस में और कुछ अन्य देशों में बैठकें आयोजित करने का जिक्र है. एडीजी सिंह ने कहा, ” वे अन्य देशों में (ऐसे ही) संगठनों के संपर्क में भी थे और वे (अपने मुद्दों को) जोर-शोर से उठाने के लिए उनके साथ तालमेल बनाकर चलते थे.” उन्होंने कहा कि पत्रों में फ्रांस और अमेरिका में दार्शनिकों की बैठकों का उल्लेख है. हालांकिए उन्होंने इनमें से किसी भी बैठक का समय नहीं बताया. सिंह ने बताया कि माओवादी पदाधिकारी कामरेड प्रकाश द्वारा कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बेडे को लिखे गए पत्र में (कोरेगांव-भीमा हिंसा के) मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की जरूरत का जिक्र है.

जेएनयू और टिस के स्टूड़ेंट्स में घोल रहे जहर

प्रकाश का पत्र कहता है, ” समान विचारधारा वाले कई कार्यकर्ता और समूह दलितों और अल्पसंख्यकों के दमन को जोर-शोर से उठाने के लिए हमारे साथ आए हैं. केंद्रीय समिति (माओवादियों की) दलित मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियां और सम्मेलन आयोजित करने के लिए 10 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि आवंटित करने पर राजी हो गई है.” प्रकाश ने पेरिस में मानवाधिकार कन्वेंशन के लिए धन भेजने का उल्लेख किया है, जिसमें तेलतुम्बेडे को शिरकत करनी थी. सिंह ने कहा, ”गिरफ्तार आरोपी विद्यार्थियों और युवकों के बीच माओवादी एजेंडा फैला रहे थे. वे जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के विद्यार्थियों की भूमिगत काम और चरमपंथ में भागीदारी के लिए उनके दिमाग में जहर घोल रहे हैं.”

माओवादियों से मिले थे 15 लाख

एडीजी सिंह ने कहा कि गिरफ्तार कार्यकर्ता सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए राष्ट्रीय मोर्चा बनाने की भी कोशिश कर रहे हैं. गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवानी और जेएनयू के विद्यार्थी उमर खालिद एल्गार परिषद में नफरत भरे भाषण के लिए जांच के दायरे में हैं. उन्होंने कहा कि कुछ गिरफ्तार कार्यकर्ताओं ने 31 दिसंबर को पुणे में एल्गार परिषद का आयोजन करने के लिए 15 लाख रुपए दिये थे. ये पैसे माओवादियों की केंद्रीय समिति से मिले थे.

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 छापे में पांच गिरफ्तारियां हुई थीं

पुणे पुलिस ने कई राज्यों में 28 अगस्त को प्रमुख वामपंथी कार्यकर्ताओं के घरों पर छापा मारा था और उनमें से पांच, वरवरा राव, वेरोन गोंजाल्विस, अरुण फेरारिया, सुधा भारद्वाज और गौतम नवालखा, को गिरफ्तार किया था. एल्गार परिषद की जांच को लेकर ये छापे मारे गए थे. इस परिषद की वजह से कथित रूप से अगले दिन कोरेगांव भीमा में हिंसा फैली थी.

वरवर राव की भूमिका थी हथियार खरीदने में

महाराष्ट्र पुलिस का यह भी कहना है कि वरवर राव ने हथियारों की खरीद में अहम भूमिका निभाई थी. सिंह ने कहा कि रोना विल्सन के लैपटॉप से प्राप्त पत्र हथियारों की खरीद का जिक्र करता है. पत्र हवाले से कहा था ” मैं (हथियारों की खरीद के लिए) नेपाल में निर्धारित व्यक्ति के संपर्क में हूं. मणिपुर में हमारे कामरेड भी इसमें मदद कर सकते हैं. लेकिन केवल वी वी (वरवर राव) ही उनसे संवाद के लिए अधिकृत हैं.”

दुश्मन को बड़ा नुकसान पहुंचाने की जरूरत

विल्सन द्वारा कामरेड प्रकाश को लिखे गए पत्र में कहा गया है, ” इससे हमें प्रक्रिया में तेजी लाने में लाभ मिलेगा और बिलकुल तैयार हथियार मिलेंगे. हम विभिन्न राज्यों में दर्जनों-दर्जन कामरेडों को गंवा रहे हैं.” सिंह ने पत्र के हवाले से कहा कि सुरेंद्र गाडलिंग और राव दुश्मन को बड़ा नुकसान पहुंचाने की जरूरत महसूस करते थे, यह एक ऐसी चीज थी जो माओवादी 2013 से नहीं कर पाए थे.