नई दिल्ली: बिहार में भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी दलों जदयू और लोजपा के बीच सीटों को लेकर मचा घमासान अब थम गया है. अब तीनों पार्टियों में सीटों के बंटवारे पर फैसला हो चुका है. ऐसे में भाजपा अब महाराष्‍ट्र में भी बिहार का फार्मूला अपनाने की तैयारी कर रही है. राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि दोनों पार्टियों में सीटों को लेकर 50-50 फार्मूले पर गठजोड़ हो गया है. दरअसल, भाजपा नेतृत्व एक साथ चुनाव लड़ने के पक्ष में है, लेकिन शिवसेना इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही है.

हाल ही में हुए मध्‍यप्रदेश, छत्‍तीगढ़ और राजस्‍थान में सरकार गंवाने के बाद बीजेपी लोकसभा चुनावों को लेकर सहयोगी दलों से रिश्‍ते मधुर बनाने में लग गई है. वहीं, भाजपा की हार के बाद सहयोगी दलों के भी तेवर तल्‍ख हो गए हैं. इसका सीधा असर बिहार में देखने को मिला, जहां लोजपा का दबाव काम आया है और उसे उम्‍मीद से ज्‍यादा सीटें मिल गईं. ऐसे में अब महाराष्ट्र में भी शिवसेना भाजपा के खिलाफ हमलावर हो गई है. राजनीति सूत्रों के मुताबिक, महाराष्‍ट्र में बीजेपी ने हाल के दिनों में एक आतंरिक सर्वे कराया, जिसमें यह बात सामने आई है कि अगर दोनों दल (शिवसेना और बीजेपी) पिछले लोकसभा चुनाव की तरह साथ लड़ते हैं तो बेहतर रिजल्‍ट आएंगे, जबकि अलग-अलग लड़ने पर दोनों ही पार्टियों को नुकसान होने की संभावना जताई गई है.

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केंद्र और महाराष्‍ट्र में भाजपा नेतृत्व से खफा है शिवसेना
बता दें कि केंद्र और महाराष्‍ट्र में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार में शिवसेना को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है, जिसके चलते उसकी बीजेपी से लगातार नाराज चल रही है. हालांकि सीट बंटवारे को लेकर बीजेपी ने अभी तक शिवसेना के साथ नरम रूख अख्तियार किया है, इसका कारण है कि शिवसेना के बार-बार केंद्र व भाजपा सरकार पर हमला बोलने के बाद भी बीजेपी की ओर से कोई बयानबाजी सामने नहीं आती है. वहीं महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस हर मंच से शिवसेना के साथ गठबंधन की बात भी कहते रहते हैं.