मुंबई: महाराष्ट्र विधान सभा में राज्य के सभी स्कूलों में मराठी भाषा को अनिवार्य बनाने से संबंधित एक विधेयक गुरुवार को सर्वसम्मति से पारित हो गया. मराठी भाषा के मंत्री सुभाष देसाई ने गुरुवार को निचले सदन में विधेयक पेश किया. Also Read - Maharashtra Local News: महाराष्ट्र सरकार ने 7.2 लाख ऑटो रिक्शा चालकों को दी बड़ी राहत, 108 करोड़ रुपये किए आवंटित

‘महाराष्ट्र के स्कूलों में मराठी भाषा का अनिवार्य पठन-पाठन विधेयक, 2020’ बुधवार को विधान परिषद में पारित हो गया.कानून में इसका अनुपालन नहीं करने पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है Also Read - इन दस राज्यों में कोविड-19 के 71 फीसदी से ज्यादा नए मामले, महाराष्ट्र और कर्नाटक सबसे आगे

‘मराठी भाषा दिवस’ के दिन 27 फरवरी को यह विधेयक पारित हुआ, जो ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित दिवंगत वी वी शिरवाडकर की जयंती है. Also Read - Corona Crisis: PM Modi ने कोविड-19 की स्थिति पर महाराष्ट्र और तमिलनाडु के CM से की बात

मराठी भाषा के मंत्री सुभाष देसाई ने कहा कि यह विधेयक तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में कानून की तर्ज पर है और यह राज्य के सभी स्कूलों में मराठी भाषा के पठन-पाठन को अनिवार्य बनाता है.

मराठी भाषा के मंत्री ने कहा कि यह भाषा 2020-2021 के अकादमिक वर्ष से चरणबद्ध तरीके में पहली से 10वीं कक्षा के सभी स्कूलों में अनिवार्य विषय होगी.

हालांकि सरकार के पास अधिनियम के सभी या किसी भी प्रावधान से एक छात्र या पूरी कक्षा को छूट देने का अधिकार होगा.
उन्होंने कहा कि कानून में इसका अनुपालन नहीं करने पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है. विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने इस विधेयक का स्वागत किया, लेकिन छूट के प्रावधानों पर आपत्ति जताई.