मुंबई। महाराष्ट्र में आंदोलनरत किसानों और सरकार के बीच समझौता हो गया है. आज इसे लेकर किसानों के शिष्टमंडल और सरकार के बीच विधानभवन में बैठक हुई. सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि हमने किसानों की अधिकतर मांगें मान ली हैं और उन्हें लिखित पत्र दे दिया गया है. बैठक के बाद मंत्री गिरीश महाजन ने जानकारी देते हुए बताया कि हर मांग पर हुई सकारात्मक चर्चा हुई है. किसानों को जो आश्वासन दिया गया है उसका निर्णय लिखित रूप से सरकार ने किसानों को दिया है. वन की जमीन किसानों के नाम करनेवाले मामले पर सरकार ने 6 महीने का वक्त मांगा है. बैठक में किसानों की तरफ से 12 लोग शिष्टमंडल में मौजूद थे.

बैठक में सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मंत्री चंद्रकांत पाटील, गिरीश महाजन, एकनाथ शिंदे, पांडुरंग फुंडकर, विष्णु सावरा और सुभाष देशमुख मौज़ूद थे. किसानों के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में इन 6 मंत्रियों की समिति गठित हुई है. साथ ही बैठक में संबंधित विभाग के आला अधिकारी भी मौज़ूद थे. बैठक में दोनों सदनों के विरोधी दल के नेता भी मौज़ूद थे. आंदोलनकारी किसानों का शिष्टमंडल तकरीबन 13 मांगे लेकर पहुंचा था. तकरीबन 90 प्रतिशत मांगों को राज्य सरकार ने मान लिया है. इन मांगों को पूरा करने में थोड़ा वक्त लग सकता है.

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गिरीश महाजन ने कहा कि अलग-अलग विषय हैं. किसी मांग के लिए 2 महीना, किसी के लिए 4 महीना, 6 महीना समय लगेगा. मोहलत दी गई है. यह काम ऐसा नहीं है कि आज बोला और कल पेपर दे दिया. समय लगने वाला है. 6 महीने का समय मांगा है, पॉजिटिव चर्चा हुई है, सब का समाधान इसे हुआ है. इसका ड्राफ्ट लेकर किसानों जो मोर्चे पर बैठ है वह हम, चंद्रकांत पाटील,और एकनाथ शिंदे वहाँ ,अभी थोड़े समय मे जाएंगे.

विष्णु सावरा ने कहा, किसानों की शिकायत है कि जो हमारी जमीन है उससे कम उनके नाम पर है. तो जितनी भी जमीन पर वो खेती कर रहे हैं वो उनके नाम पर होनी चाहिए. सीएम भी राजी हैं. चीफ सेक्रेटरी इसे देखेंगे और इसे 6 महीने में लागू कर दिया जाएगा.