मुंबई. पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे के बेटे और कांग्रेस विधायक नितेश राणे एक बार फिर चर्चा में हैं. राणे एक बैठक में अपना आपा खो बैठे. मछुआरों की समस्याओं पर चर्चा करने के लिए एक मीटिंग रखी गई थी. इसमें मछुआरों के साथ नितेश राणे और सरकारी अधिकारी भी मौजूद थे. चर्चा के दौरान गुस्से में उन्होंने सरकारी अधिकारी पर मछली फेंक दी.Also Read - Manipur Polls 2022: मणिपुर में विधानसभा चुनाव से पहले TMC का एकमात्र विधायक BJP में शामिल

इस वीडियो क्लिप में आप देख सकते हैं कि कैसे नीतेश राणे पहले तो अधिकारी पर खूब भड़के और अचानक अपना आपा खो बैठे. उन्होंने आयुक्त की मेज पर रखी एक मछली उठाई और उसे आयुक्त पर फेंक दिया. हालांकि इस घटना के उन्होंने बाद कहा कि कोंकण क्षेत्र के पारंपरिक मछुआरे समुदाय की समस्याओं की ओर आयुक्त के कथित तौर पर नजरअंदाज करने वाले रवैये के विरोध में उन्होंने ऐसा किया. Also Read - Punjab विधानसभा चुनाव पर Zee Opinion Poll की खास बातें, किस पार्टी को कितनी सीटें? कौन सबसे पसंदीदा सीएम, जानें सबकुछ

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गौरतलब हो कि सिंधुदुर्ग में दो तरह के मछुआरे हैं. एक वो जो मछली पकड़ने के लिए पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं और दूसरे वो जो आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हैं. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के नियमों के मुताबिक, दोनों समुदायों के लिए मछली पकड़ने के इलाकों का स्पष्ट तौर पर सीमांकन किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि आधुनिक तरीके से मछली पकड़ने वाले मछुआरे पारंपरिक तरीके से मछली पकड़ने वाले मछुआरों के इलाके में अक्सर घुसते हैं जिससे उन्हें नुकसान होता है.

नितेश राणे ने कहा कि सिंधुदुर्ग के मत्स्यपालन आयुक्त से बात की और चार फरवरी 2016 के सरकार के प्रस्ताव को उनके संज्ञान में लाए जिसमें दोनों समुदायों के मछुआरों के लिए स्पष्ट तौर पर नियमों को बताया गया है. लेकिन कोई हल नहीं निकला. जिसके कारण पारंपरिक मछुआरों के साथ लंबे समय से अन्याय हो रहा है. कोई ठोस कदम न उठाए जाने के बाद उन्होंने आक्रामक कदम उठाया.