नई दिल्‍ली: महाराष्‍ट्र में महा विकास आघाडी गठबंधन के नेतृत्‍व में बनी उद्धव ठाकरे की सरकार के सहयोगी दलों से मतभेद के सुर सुनाई देने लगे हैं. जहां गठबंधन की तीन सहयोगियों में से एक कांग्रेस, प्रमुख निर्णय लेने की प्रक्रिया खुद को अलग बता रही कांग्रेस की यह शिकायत सामने आ गई है कि उसे गठबंधन में जो स्‍थान मिलना चाहिए था, वह नहीं मिल रहा है. Also Read - पूर्वांचल का वो बागी नेता जिसने कभी इंदिरा गांधी तो कभी राजीव को नकारा, जानें युवा तुर्क की पीएम की कुर्सी तक पहुंचने की कहानी

महाराष्‍ट्र सरकार में कांग्रेस के कोटे से मंत्री बने बालासाहेब ने कहा, हमारी गठबंधन में जो हमें स्थान मिलना चाहिए, कुछ बातें है, जो हम मुख्यमंत्री के सामने अपनी बातें रखेंगे. बता दें कि इससे पहले कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी कह चुके हैं कि महाराष्ट्र सरकार मे कांग्रेस शामिल जरूर है, लेकिन वो सरकार की निर्णय प्रक्रिया में नहीं है. Also Read - कांग्रेस का सवाल- भारतीय सेना LAC पर हमारी ही सरजमी से क्यों हट रही है पीछे, क्या पीएम मोदी के शब्दों के मायने नहीं?

महाराष्‍ट्र सरकार में पीडब्‍ल्‍यूडी मंत्री अशोक चव्‍हाण ने शनिवार को कहा था, ”कुछ मुद्दे हैं महाविकास अघाडी (एमवीए) के सहयोगी और नौकरशाही के बीच. हम अपने सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए सीएम से मिलने का प्रयास कर रहे हैं. हम अगले 2 दिनों में उनसे मिलने की उम्मीद करते हैं” Also Read - 'मैं महाराजा, टाइगर और मामा नहीं और न चाय बेचता हूं, मैं कमलनाथ हूं'

बताया जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बालासाहेब थोराट और पीडब्ल्यूडी मंत्री अशोक चव्हाण राज्यपाल कोटा से विधान परिषद नामांकनों, राज्य सरकार द्वारा संचालित निगमों एवं बोर्ड में नियुक्ति और कांग्रेस मंत्रियों को आ रही समस्याओं से जुड़े मुद्दे पर चर्चा करने के लिए ठाकरे से सोमवार को मुलाकात करेंगे.

शिवसेना नीत महाराष्ट्र विकास आघाडी (एमवीए) सरकार में तनाव के बीच कांग्रेस सरकार में अपनी भूमिका को प्रभावी बनाना चाहती है. कांग्रेस के एक नेता के मुताबिक, मुख्यमंत्री राकांपा के अध्यक्ष, शरद पवार से कोविड-19 वैश्विक महामारी और चक्रवात ‘निसर्ग’ से प्रभावित लोगों को राहत देने समेत अन्य कई मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं. इससे ऐसी भावना पैदा हो रही है कि प्रदेश कांग्रेस को अलग-थलग कर दिया गया है.

प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने इस हफ्ते की शुरुआत में मुलाकात कर यह चर्चा की थी कि पार्टी नेताओं एवं मंत्रियों को गठबंधन सरकार में निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनाया जा रहा है. मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी मिलिंद नारवेकर भी कांग्रेस नेतृत्व के विचारों को जानने के लिए इस बैठक में सीएम ठाकरे के प्रतिनिधि के रूप के रूप में मौजूद रहे थे.