मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले ईवीएम को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते हुए प्रमुख विपक्षी दलों ने मतपत्रों का फिर से इस्तेमाल किये जाने के लिए शुक्रवार को आधार तैयार करते हुए इस मुद्दे को लेकर 21 अगस्त को विरोध मार्च की घोषणा की. ईवीएम मुद्दे को लेकर कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख बालासाहेब थोराट, मनसे प्रमुख राज ठाकरे, राकांपा के वरिष्ठ नेता अजीत पवार ने यहां एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया.

उन्होंने अप्रैल-मई के लोकसभा चुनाव के परिणामों को ‘चौंकाने’ वाला बताया और उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई. वर्धा में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि विपक्षी पार्टियों को ईवीएम मशीन में खामियां तलाशने के बदले अपनी हार का आत्मविश्लेषण करना चाहिए. विपक्षी नेताओं ने कहा कि वे लोगों तक पहुंचेंगे और भरे हुए फॉर्म प्राप्त करेंगे, जिसमें कहा गया होगा कि वे मतपत्र वापस चाहते हैं. ठाकरे ने कहा कि भाजपा और शिवसेना को भी 21 अगस्त को होने वाले मार्च में शामिल होना चाहिए. भाजपा ने इस वर्ष अप्रैल-मई में हुए लोकसभा चुनावों में 303 सीटों पर जीत दर्ज की थी.

महाराष्ट्र में भाजपा ने राज्य की 48 सीटों में से 23 सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि शिवसेना को 18 सीटें मिली थी. पवार ने यहां पत्रकारों को बताया कि ईवीएम को लेकर संदेह जताये जा रहे है. एक लोकतंत्र में इस तरह की चीजें नहीं होनी चाहिए. विभिन्न पार्टियों और संगठनों ने मशीनों के इस्तेमाल को लेकर चिंताएं जाहिर की है. राकांपा के वरिष्ठ नेता छगल भुजबल, पीडब्लयूपी के नेता जयंत पाटिल, स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के राजू शेट्टी और भाकपा के प्रकाश रेड्डी उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया. राज्य में विधानसभा चुनाव सितम्बर-अक्टूबर में प्रस्तावित है.