Maharashtra News: महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के पूर्व डीजीपी परमबीर सिंह को निलंबित कर दिया है. उन पर कई गंभीर आरोप लगे हैं जिनकी जांच चल रही है. मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह इसी मंगलवार को लगातार दूसरे दिन महाराष्ट्र आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) के सामने पेश हुए थे और अपने खिलाफ चल रहे जबरन वसूली के दो मामलों के संबंध में अपना बयान दर्ज कराया. दोनों मामलों की जांच सीआईडी कर रही है. हालांकि इन सबके बीच सिंह को निलंबित करने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया चल रही थी. गौरतलब है कि मुंबई पुलिस आयुक्त के पद से हटाए जाने के बाद उन्हें डीजी होमगार्ड बनाया गया था.Also Read - Wine at Supermarket: संजय राउत का तर्क, किसानों की आमदनी दोगुना करने को उठाया कदम

हालांकि अब महाराष्ट्र सरकार ने बृहस्पतिवार को मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह को निलंबित कर दिया और उनके खिलाफ ‘‘कुछ अनियमितताओं और खामियों’’ के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. जिस दिन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को रीढ़ की सर्जरी के बाद 12 नवंबर को यहां एक निजी अस्पताल से छुट्टी मिली थी, उसी दिन निलंबन आदेश को मंजूरी दी गई थी. अधिकारी ने कहा कि खामियों में ड्यूटी से अनधिकृत अनुपस्थिति शामिल है. Also Read - नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने पिता की याद में बनाया मुंबई में बंगला, 3 साल तक खुद एक-एक बारीकी को परखा

सूत्रों ने कहा कि सिंह पिछले छह महीने में महाराष्ट्र होमगार्ड प्रमुख नियुक्त किए जाने के बाद पेश नहीं हुए. उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य के आधार पर उन्हें 29 अगस्त तक की छुट्टी दी गई थी, लेकिन उसके बाद भी वह ड्यूटी पर नहीं आए. सिंह ने मार्च में राज्य के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार और आधिकारिक पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए थे, जब उन्हें एंटीलिया विस्फोटक सामग्री घटना के बाद मुंबई पुलिस आयुक्त के पद से हटा दिया गया था. Also Read - भिवंडी के फर्नीचर गोदाम में लगी भीषण आग, कई अन्य गोदाम भी चपेट में आए; कोई हताहत नहीं

उन्होंने देशमुख पर आरोप लगाया था कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मुंबई में रेस्तरां और बार से एक महीने में 100 करोड़ रुपये लेने के लिए कहा था. हालांकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता ने इस आरोप से इनकार किया था. इन आरोपों की जांच कर रहे आयोग ने सिंह को अपना बयान दर्ज करने के लिए पेश होने का निर्देश दिया था, लेकिन आईपीएस अधिकारी पिछले महीने ही उसके समक्ष पेश हुए थे.

(इनपुट भाषा)