Maharashtra News: महाराष्ट्र में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshiyari) और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के बीच धार्मिक स्थल को खोलने को लेकर एक बार फिर ‘ठन’ गई. बात सेक्युलरिज़्म तक पहुंच गई. दरअसल, BJP राज्यभर में मंदिरों को खोलने के लिए सांकेतिक भूख हड़ताल और प्रदर्शन कर रही है. इसे लेकर राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को खत लिखा. खत में राज्यपाल ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर सवाल उठाते हुए पूछा कि ‘क्या आप अचानक से सेक्युलर हो गए?’ Also Read - भाजपा का उद्धव ठाकरे पर पलटवार, कहा- महाराष्ट्र के सीएम के पास सरकार के काम के बारे में बोलने के लिए कुछ नहीं है

जवाब में ठाकरे ने सवाल किया कि क्या कोश्यारी के लिए हिंदुत्व का मतलब केवल धार्मिक स्थलों को पुन: खोलने से है और क्या उन्हें नहीं खोलने का मतलब धर्मनिरपेक्ष होना है. उद्धव ठाकरे ने कहा है कि ‘पत्र में मेरे हिंदुत्व का उल्लेख करना गलत है. हिंदुत्व के लिए मुझे आपके सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है.’ ठाकरे ने कहा, ‘क्या धर्मनिरपेक्षता संविधान का अहम हिस्सा नहीं है, जिसके नाम पर आपने राज्यपाल बनते समय शपथ ग्रहण की थी.’ उन्होंने कहा, ‘लोगों की भावनाओं और आस्थाओं को ध्यान में रखने के साथ-साथ, उनके जीवन की रक्षा करना भी अहम है. लॉकडाउन अचानक लागू करना और समाप्त करना सही नहीं है.’

इसके अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्यपाल बीएस कोश्यारी को सूचित किया है कि राज्य में कोविड-19 संबंधी हालात की पूरी समीक्षा के बाद धार्मिक स्थलों को पुन: खोलने का फैसला किया जाएगा. ठाकरे ने कोश्यारी के सोमवार को लिखे पत्र के जवाब में मंगलवार को पत्र लिखकर कहा कि राज्य सरकार इन स्थलों को पुन: खोलने के उनके अनुरोध पर विचार करेगी. कोश्यारी ने अपने पत्र में कहा था कि उनसे तीन प्रतिनिधिमंडलों ने धार्मिक स्थलों को पुन: खोले जाने की मांग की है.

ठाकरे ने अपने जवाब में कहा कि यह संयोग है कि कोश्यारी ने जिन तीन पत्रों का जिक्र किया है, वे भाजपा पदाधिकारियों और समर्थकों के हैं. कोश्यारी आरएसएस से जुड़े रहे हैं और भाजपा के उपाध्यक्ष रह चुके हैं. उन्हेंने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा था, ‘क्या आप अचानक धर्मनिरपेक्ष हो गए हैं?’

(इनपुट: भाषा, ANI)