मुंबई: महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग (Maharashtra Human Rights Commission) ने 2008 मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपी BJP MP प्रज्ञा सिंह ठाकुर को हिरासत में प्रताड़ित (custodial torture) करने की शिकायत पर राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को मंगलवार को सम्मन जारी किया है.Also Read - UP Election 2022: अमित शाह ने कैराना से शुरू किया प्रचार, पलायन के मुद्दे का ज़िक्र कर BJP के लिए मांगे वोट

आयोग ने पुलिस प्रमुख से 6 अप्रैल को उसके समक्ष उपस्थित होने को कहा है. Also Read - अमित शाह ने 'जिला सुशासन सूचकांक' लॉन्च किया, कहा- जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव जल्द होंगे, राज्य का दर्जा बहाल करेंगे

पेशे से वकील आदित्य मिश्रा ने 2018 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दी थी. उस दौरान ठाकुर (वर्तमान में बीजेपी सांसद) ने टीवी पर एक साक्षात्कार में आरोप लगाया था कि गिरफ्तारी के बाद राज्य (महाराष्ट्र) पुलिस के आतंकवाद रोधी दस्ते (ATS)ने उन्हें प्रताड़ित किया था. Also Read - UP Election 2022: इन 47 सीटों पर नज़र लगाए हैं प्रमुख राजनीतिक दल, सिर्फ इतने वोटों से हुई थी हार-जीत

आयोग ने इस मामले को राज्य मानवाधिकार आयोग के पास भेज दिया था. अर्जी में अनुरोध किया गया है कि आयोग को ठाकुर के आरोपों पर संज्ञान लेना चाहिए, क्योंकि यह ”भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) से जुड़ा मुद्दा है.”

ठाकुर फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर हैं. वह 29 सितंबर, 2008 में उत्तरी महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए विस्फोट मामले की मुख्य आरोपी हैं और वह 9 साल जेल में रहीं हैं. मालेगांव की एक मस्जिद के पास बाइक पर रखा बम फटने से 6 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. मुकदमे की सुनवाई चल रही है.