अयोध्या का राममंदिर भारतीय जनता पार्टी के लिए एक बड़ा चुनावी मुद्दा होता है। हांलाकि चुनाव बाद यह मुद्दा किसी ठंडे बस्ते में चला जाता है। बड़ा हास्यास्पद है कि उसकी जगह पर राम मंदिर किसी और तरीकों से सुनाई देता है। फिलहाल महाराष्ट्र की फड़नवीस सरकार ने ओशिवाड़ा स्टेशन का नाम बदलकर ‘राम मंदिर’ कर देने का फैसला किया है। जोगेश्वरी और गोरेगाँव के बीच बनाए गए इस नए स्टेशन का नाम राम मंदिर करने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस ने खुद हरी झंडी दी। रेलवे अधिकारियों ने नाम बदलने की पुष्टि की है। शिवसेना और भाजपा नेताओं ने पिछले दिनों नाम बदले जाने को लेकर याचिका दायर की थी और माँग की थी कि इस स्टेशन का नाम बदलकर राम मंदिर किया जाए। Also Read - Mulayam Singh Yadav की बहू Aparna Yadav ने राम मंदिर के लिए 11 लाख रुपए दान में दिए, फैमिली को लेकर दिया बड़ा बयान

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स्टेशन के नाम बदलने पर भाजपा का तर्क है कि इस जगह पर एक बहुत प्रसिद्ध राम मंदिर है। कुछ रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन का नाम ओशिवा़ड़ा ही रहना चाहिए था क्योंकि यह इलाका इसी नाम से जाना जाता है। लेकिन यह फैसला राज्य सरकार के आदेश पर किया जा रहा है। नाम बदलने की याचिका दायर करने वालों में भाजपा नेता विद्या ठाकुर और शिवसेना के नेता गजानन कीर्तिकर हैं। हालांकि इन नेताओं का मानना है कि इस राम मंदिर का अयोध्या के बाबरी मस्जिद विवाद से कोई लेना देना नहीं है। यह भी पढेंः महाराष्ट्र नगर परिषद चुनावः नोटबंदी के बाद मोदी सरकार की अग्निपरीक्षा कल Also Read - अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए 27 दिनों मे इकट्ठा हुए 1000 करोड़ रुपये, डेढ़ लाख टोलियां जुटा रहीं चंदा

गौरतलब है कि 1992 में उत्तर प्रदेश के अय़ोध्या में बाबरी मस्जिद ढ़हा दी गई थी। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद पर इस काम को अंजाम देने के आरोप लगे। इन हिंदू संगठनों का दावा है कि बाबरी मस्जिद वाले स्थान पर ही भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। इसलिए उस स्थान पर मंदिर बनाया जाना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी ने पिछले 27 सालों में राममंदिर के नाम पर खूब राजनीति चमकायी लेकिन वास्तविकता में राममंदिर पर कुछ खास नहीं हो सका। ऐसे में इस तरह किसी स्टेशन का नाम बदलकर राम मंदिर किया जाना हास्यास्पद प्रतीत होता है।