मुंबईः मुंबई की एक विशेष अदालत ने सितंबर 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में बंद कमरे में सुनवाई करने से मंगलवार को इनकार कर दिया. इस मामले में भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर भी एक आरोपी हैं. अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें उसने इस मामले की सुनवाई बंद कमरे में करने का अनुरोध किया था. विशेष न्यायाधीश वी एस पडालकर ने कहा कि एनआईए का आवेदन अस्वीकार करने के कारणों में से एक यह है कि सुनवाई ‘ पारदर्शी तरीके से ’ की जा सके.

अदालत ने मीडिया को कुछ पाबंदियों के साथ मामले की सुनवाई की रिपोर्टिंग करने की अनुमति दे दी. मीडिया कर्मियों को अपने संबंधित मीडिया संस्थानों के पहचान पत्रों की प्रतियां जमा करानी होगी. अदालत ने कहा कि (सुनवाई के दौरान मीडियाकर्मियों द्वारा) किसी इलेक्ट्रोनिक उपकरण का इस्तेमाल नहीं किया जाए और बस तथ्यपरक स्थिति के अनुसार ही मामले की रिपोर्टिंग की जाए. अदालत ने यह भी कहा कि जब तक इस मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो जाए तबतक उस पर कोई संपादकीय नहीं लिखा जाए तथा निजी राय या किसी प्रकार की चर्चा/परिचर्चा नहीं की जाए.

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अदालत के बंद कमरे में होने वाली सुनवाई में केवल न्यायाधीश, अधिवक्ता, आरोपी तथा प्रत्यक्षदर्शी ही मौजूद रहते हैं. इस तरह की सुनवाई में मीडिया या जनता को कार्यवाही की जानकारी नहीं दी जाती है. एनआईए ने इससे पहले यह कहते हुए अदालत में अर्जी दायर की थी कि वह प्रेस की आजादी के पक्ष में है लेकिन यह सुनवाई बंद कमरे में की जाए क्योंकि यह ‘संवेदनशील मामला’ है. अभियोजन पक्ष ने अपनी अर्जी में कहा कि वह सांप्रदायिक सद्भाव को बचाए रखने के लिए बंद कमरे में सुनवाई चाहता है और उसने यह भी दावा किया कि गवाहों को खतरा भी है.

लेकिन अदालत ने कहा कि एनआईए ने ‘अंदरूनी सुरक्षा खतरे या सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ने’ के बारे में कोई सूचना उसके समक्ष नहीं रखी . अदालत ने कहा कि गवाहों को धमकी संबंधी कोई पत्र भी एनआईए को नहीं मिला है. इससे पहले, कुछ पत्रकारों ने अदालत में आवेदन देकर एनआईए की अर्जी को चुनौती दी थी और कहा था कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस मुकदमे की खुली अदालत में सुनवाई हो और एनआईए कानून के तहत गवाहों की सुरक्षा के लिए उपयुक्त सुरक्षा मानक की व्यवस्था हो.

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मीडिया कर्मियों ने यह भी कहा कि गवाहों को धमकी मिलने का कोई उदाहरण सामने नहीं आया है. महाराष्ट्र के नासिक जिले में मालेगांव कस्बे में एक मस्जिद के निकट 29 सितंबर 2008 को धमाका हुआ था. इसमें छह लोगों की मौत हो गई थी जबकि करीब 100 लोग घायल हो गए थे. पिछले साल अक्टूबर में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई थी. उससे पहले विशेष अदालत ने गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम और भादंसं की संबंधित धाराओं के तहत ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित और अन्य के खिलाफ आरोप तय किये थे. ठाकुर और अन्य आरोपी फिलहाल जमानत पर हैं. अदालत सूचीबद्ध 475 गवाहों में से अबतक करीब 130 गवाहों का परीक्षण कर चुकी है.