नई दिल्ली: मराठा समुदाय को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ी श्रेणी के तहत 16 फीसदी आरक्षण देने के प्रस्ताव वाले विधेयक को महाराष्ट्र विधानसभा ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया. अब इस विधेयक को उच्च सदन में रखा जाएगा. मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने मराठा समुदाय को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण देने संबंधी राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (एसबीसीसी) की सिफारिशों पर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) सदन में रखी. सीएम ने कहा, हमने मराठा आरक्षण के लिए प्रक्रिया पूरी कर ली है और हम आज विधेयक लाए हैं.Also Read - क्‍या शिवसेना कांग्रेस के नेतृत्‍व वाले UPA में होगी शामिल? संजय राउत ने दिया ये जवाब

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हालांकि सीएम ने कहा कि धनगर आरक्षण पर रिपोर्ट पूरी करने के लिए एक उप समिति का गठन किया गया है और जल्द ही एक रिपोर्ट और एटीआर विधानसभा में पेश की जाएगी. इससे पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा था कि मराठा आरक्षण को लेकर विधेयक पेश करने से पहले यह कदम उठाया जाएगा. सीएम ने कहा था कि जिन नियमों के तहत राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया, उसकी सिफारिशों के तहत केवल एटीआर को सदन के पटल पर रखा जाएगा.

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उन्होंने बताया था कि यह 52 वीं रिपोर्ट है और इससे पूर्व 51 रिपोर्ट सदन के पटल पर नहीं रखी जा चुकी हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की विपक्ष की मांग के पीछे समाज के समुदायों के बीच ‘‘विभाजन’’ पैदा करने की मंशा है. उन्होंने कहा कि गड़रियों के आरक्षण पर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) की रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि हम इस रिपोर्ट की एटीआर भी सदन के पटल पर रखेंगे. अनुसूचित जनजाति (एसटी) के आरक्षण की रक्षा की जाएगी.

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सरकार ने बताया था कि महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (एसबीसीसी) ने मराठा समुदाय की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर रिपोर्ट सौंपने से पहले 43,629 परिवारों का सर्वेक्षण किया था. राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री राजकुमार बडोले ने विधान परिषद के कांग्रेसी सदस्य शरद रैंपिस, विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे, राकंपा सदस्य हेमंत ताकले के सवाल पर विधान परिषद में यह जानकारी दी थी. विपक्षी सदस्यों ने अपने सवाल में कहा था कि मराठा समुदाय को आरक्षण देने की मांग वाले आंदोलन के हिंसक हो जाने पर पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें कई लोगों की जानें चली गईं.

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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस वर्ष नौ अगस्त को बुलाए बंद के दौरान पुलिस ने मासूम लोगों के खिलाफ झूठे मामले भी दर्ज किए.उन्होंने कहा कि पार्टी के नेताओं ने ऐसे मामलों को वापस लिए जाने के लिए पुलिस आयुक्त से मुलाकात भी की थी. इसके जवाब में बडोले ने कहा कि पुलिस ने उन जगहों पर कानून के अनुसार कार्रवाई की, जहां जुलाई-अगस्त2018 में मराठा आरक्षण के लिए किया गया आंदोलन हिंसा में बदल गया था. उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि एसबीसीसी ने राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपने से पहले 43,629 परिवारों का सर्वेक्षण किया था.

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बडोले ने कहा कि सरकार मारे गए प्रदर्शनकारियों के परिवार वालों को सहायता मुहैया करा रही है.आयोग ने पिछले सप्ताह अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी , जिसके बाद मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने आरक्षण की मांग पूरी करने का संकेत भी दिया था. सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि मराठा समुदाय के लोग सरकार और अर्द्ध सरकारी सेवाओं में कम प्रतिनिधित्व के साथ “सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग के नागरिक” हैं.