मुंबई: महाराष्ट्र राज्य के पिछड़ा वर्ग आयोग ने मराठा समुदाय की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर अपनी रिपोर्ट गुरुवार को राज्य के मुख्य सचिव डी के जैन को सौंप दी. एक सरकारी सूत्र ने बताया कि समुदाय के लिए आरक्षण की मांग के पक्ष में सुझाव दिए गए हैं. इसका अंदाजा थोड़ी देर बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के बयान से मिला, जिसमें उन्होंने आरक्षण की मांग करने वाले आंदोलनकारियों को जश्न की तैयारी करने को कहा. Also Read - महाराष्ट्र: किसान को 51 पैसे प्रति किग्रा मिली प्याज की कीमत, मुख्यमंत्री को भेजी 216 रुपए की पूरी रकम

जैन ने रिपोर्ट मिलने के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘(रिपोर्ट के) अध्ययन के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा.’’ एक सरकारी सूत्र के अनुसार, रिपोर्ट में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को दिए गए आरक्षण से छेड़छाड़ किए बिना मराठा समुदाय की शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग के पक्ष में सुझाव दिए गए हैं. राज्य की आबादी में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली मराठा समुदाय की आबादी 30 प्रतिशत है. इस साल जुलाई और अगस्त में आरक्षण के लिए जबरदस्त आंदोलन हुआ था. Also Read - मराठा आरक्षण आंदोलन: औरंगाबाद में युवक ने की खुदकुशी, फेसबुक पर लिखा- 'आज एक मराठा जा रहा है'

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ‘‘हमें रिपोर्ट मिल गयी है. अब सभी वैधानिक प्रक्रिया अगले 15 दिन में पूरी हो जाएगी.’’ इससे पहले दिन में अहमदनगर जिले में रैली में फडणवीस ने कहा कि कुछ लोगों ने आरक्षण के लिए 26 नवंबर से फिर से आंदोलन छेड़ने की धमकी दी है. मांगे पूरी करने का संकेत देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘आप श्रेय लेने के लिए यह सब क्यों करना चाहते हैं? आंदोलन की जगह जश्न मनाने के लिए तैयार हो जाइए.’’ Also Read - महाराष्ट्र सरकार की अपील पर मराठा संगठन बोले- सरकार पर भरोसा नहीं, सीएम इस्तीफा दें

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भाजपा के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि अगले सोमवार से शुरू हो रहे राज्य विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान आरक्षण विधेयक को सदन में लाया जा सकता है. सरकारी सूत्र के मुताबिक न्यायमूर्ति एन जी गायकवाड़ (सेवानिवृत्त) के नेतृत्व वाले आयोग ने उसे मिले दो लाख ज्ञापनों, लगभग 45,000 परिवारों के सर्वेक्षण के साथ ही मराठा समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के प्रायोगिक आंकड़ों का अध्ययन किया.

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भाजपा के मंत्री ने कहा कि पार्टी ओबीसी वोट को नहीं गंवा सकती, इसलिए मराठा के वास्ते अलग से कोटा होगा. उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को मराठा समुदाय को 16 प्रतिशत आरक्षण देना है, कम नहीं. फिलहाल यहां 52 प्रतिशत आरक्षण है. इसलिए कुल आरक्षण 68 प्रतिशत तक होगा.’’