मुंबई: महाराष्‍ट्र की राजधानी मुंबई के एक उपनगर में अपने घर से 30 किलोमीटर दूर पैदल चलकर आए प्रवासी की श्रमिक स्पेशल ट्रेन पकड़ने से पहले रेलवे स्‍टेशन पर मौत हो गई. राजस्थान का 45 साल का एक श्रमिक वसई रोड रेलवे स्टेशन पर बेहोश हो गया और उसकी मौत हो गई. Also Read - महाराष्ट्र: छात्रावास अधीक्षक ने छात्रा से किया रेप, प्रेग्‍नेंट होने पर मां ने नर्स से कराया गर्भपात

राजस्थान स्थित अपने गृह नगर जाने के वास्ते श्रमिक स्पेशल ट्रेन पकड़ने के लिए उक्त मजदूर अपने स्थानीय आवास से 30 किलोमीटर पैदल चलकर वसई रोड स्टेशन आया था. शंकर लाल पेशे से बढ़ई था और एक निर्माण स्थल पर काम कर रहा था. Also Read - Coronavirus Jharkhand Update: एक दिन 95 नए मामले, संक्रमितों की संख्या हुई 922, रांची में एक और मौत

श्रमिक शंकर लाल गुरुवार दोपहर को प्रचंड गर्मी में मुंबई- अहमदाबाद राजमार्ग पर दौड़ता और चलता रहा, ताकि वह स्टेशन पहुंच सके. श्रमिक के पास कोई निजी वाहन या ऑटोरिक्शा करने तक के पैसे नहीं थे. अधिकारी ने कहा कि स्टेशन पहुंचने पर उसकी तबियत खराब हो गई, जिसके कारण उसने उल्टी भी की. मानिकपुर थाने की पुलिस श्रमिक को अस्पताल ले गई जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया. Also Read - Coronavirus: देश में कोविड-19 के कुल मामले हुए 2 लाख 28 हजार, इन राज्यों में एक महीने में दस गुना से अधिक नए मामले

एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि घटना गुरुवार शाम को हुई और मृतक की पहचान ठाणे जिले के भायंदर के निवासी हरीश चंद्र शंकर लाल के रूप में की गई है.

लॉकडाउन के दौरान शंकर लाल बेरोजगार हो गया था. श्रमिक और उसके कुछ दूर के रिश्तेदारों ने स्पेशल ट्रेन से गृह नगर वापस जाने की योजना बनाई थी. बुधवार को उन्हें सूचना मिली कि गुरुवार को राजस्थान के लिए एक विशेष ट्रेन जाने वाली है.

अधिकारी ने बताया कि शंकर लाल गुरुवार दोपहर को प्रचंड गर्मी में मुंबई- अहमदाबाद राजमार्ग पर दौड़ता और चलता रहा ताकि वह स्टेशन पहुंच सके. श्रमिक के पास कोई निजी वाहन या ऑटोरिक्शा करने तक के पैसे नहीं थे. अधिकारी ने कहा कि स्टेशन पहुंचने पर उसकी तबियत खराब हो गई, जिसके कारण उसने उल्टी भी की. मानिकपुर थाने की पुलिस श्रमिक को अस्पताल ले गई जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया.

इस संबंध में मानिकपुर थाने में दुर्घटना वश मौत का मामला दर्ज किया गया है. भायंदर में रहने वाले प्रवासी श्रमिकों का कहना है कि उन्हें रेलवे स्टेशन तक ले जाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई. वसई के तहसीलदार किरण सुरवसे से संपर्क किए जाने पर उन्होंने कहा कि केवल वसई में रहने वाले प्रवासी श्रमिकों को रेलवे स्टेशन पहुंचाने के लिए व्यवस्था की गई थी और भयंदर उनके कार्यक्षेत्र में नहीं आता.