मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने रेलवे से यह स्पष्ट करने के लिये कहा है कि लॉकडाउन के कारण फंसे प्रवासी श्रमिकों को वापस उनके घर भेजने में रेल यात्रा में आने वाली लागत का 85 फीसदी वह वहन करेगा या नहीं. Also Read - Cyclone Nisarga: महाराष्ट्र में हवाओं की रफ़्तार हुई कम, कमज़ोर पड़ा तूफान निसर्ग

गृह मंत्री अनिल देशमुख ने एक वीडियो संदेश में कहा कि इन श्रमिकों के पास नौकरी नहीं है और इन लोगों से रेलवे को किराया नहीं वसूलना चाहिये. Also Read - Cyclone Nisarga: महाराष्ट्र से टकराया 'निसर्ग' तूफान, कई जगहों पर तेज हवा और बारिश शुरू

बता दें कि रेलवे ने प्रवासी श्रमिकों को उनके घर पहुंचाने के लिये चलायी जाने वाली विशेष ट्रेनों के किराये में 85 प्रतिशत सबसिडी देने की बात कही है. बाकी बचे 15 फीसदी किराये का भुगतान राज्य सरकारें करेंगी. Also Read - Cyclone Nisarga: चक्रवाती तूफान की महाराष्ट्र और गुजरात में इस समय होगी एंट्री, समुद्र में उठेंगी ऊंची लहरें

देशमुख ने कहा, ‘महाराष्ट्र सरकार की ओर से, मैं भारतीय रेल से इसमें स्पष्टता चाहता हूं कि वह टिकट का 85 प्रतिशत वहन कर रहा है या नहीं. अब तक रेलवे से इस बारे में आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है.’

उन्होंने इंगित किया कि हर व्यक्ति यह जानता है कि इन प्रवासी श्रमिकों के पास पिछले 40 दिन से नौकरी नहीं है और वे अपने घर वापस जाने के लिये बेचैन हैं.

देशमुख ने कहा कि रेलवे को प्रवासी श्रमिकों से किराया वसूलने से बचना चाहिये.

एक अधिकारी ने बताया कि अब तक, करीब 36 हजार प्रवासी श्रमिक महाराष्ट्र से अपने गृह स्थान के लिये निकल चुके हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को कहा था कि उनकी पार्टी की राज्य इकाई कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन के चलते दूसरे राज्यों में फंसे जरूरतमंद प्रवासी श्रमिकों के टिकट का खर्च वहन करेगी.