नागपुर/ द‍िल्‍ली: महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस चुनावी हलफनामें में आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं देने के मामले में गुरुवार को नागपुर की एक अदालत के सामने पेश हुए. कोर्ट ने पूर्व सीएम फडणवीस को 15,000 रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी. Also Read - Coronavirus को लेकर राम गोपाल वर्मा ने किया भद्दा मज़ाक, यूजर्स बोले- थोड़ी तो शरम करो, पुलिस लेगी एक्शन

सीनियर बीजेपी नेता को मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पी. एस. इंगले ने गुरुवार को अदालत में पेश होने का अंतिम मौका दिया था. कोर्ट अधिवक्ता सतीश उके की याचिका पर सुनवाई कर रही है. मामले पर अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी. Also Read - कांग्रेस ने सामूहिक पलायन पर सरकार से पूछे सवाल, कहा- गरीबों की जिंदगी मायने रखती है या नहीं

बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर आरोप हैं कि उन्‍होंने 2014 के चुनाव के हलफनामें में अपने खिलाफ लंबित दो आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं दी थी.यदि इस मामले में पूर्व सीएम दोषी साबित हुए तो उन्‍हें जुर्माना या छह माह की सजा या फिर दोनों सजाएं एक साथ हो सकती हैं. Also Read - केजरीवाल ने लोगों को गीता पाठ करने की दी सलाह, कहा- गीता के 18 अध्याय की तरह लॉकडाउन के बचे हैं 18 दिन 

बता दें कि बीते 18 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस की उस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई पूरी कर ली, जिसमें उन्होंने 2014 के चुनावी हलफनामें में अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का ब्योरा कथित तौर पर नहीं देने पर मुकदमें का सामने करने के शीर्ष अदालत के फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था.

जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ के समक्ष फड़णवीस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि चुनाव लड़ने वाले अन्य उम्मीदवारों के लिए इस मुद्दे के दूरगामी परिणाम होंगे और न्यायालय को एक अक्टूबर 2019 के अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अपने फैसले में बंबई हाईकोर्ट का फैसला निरस्त कर दिया था. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में फड़णवीस को क्लीन चिट दे दी थी और कहा था कि वह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपीए) के तहत कथित अपराध पर मुकदमें का सामना करने के हकदार नहीं हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सतीश उइके की अपील पर सुनाया था. उन्होंने बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी. शीर्ष कोर्ट ने उइके की याचिका पर 23 जुलाई 2019 को सुनवाई पूरी करते हुए कहा था कि फडणवीस द्वारा चुनावी हलफनामे में दो आपराधिक मामलों की जानकारी कथित तौर पर नहीं देने पर सुनवाई के दौरान फैसला होगा.

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा था, हमारा सरोकार बहुत ही सीमित मुद्दे पर है कि क्या इस मामले में पहली नजर में जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 125 लागू होती है या नहीं. यह धारा मूल रूप से गलत हलफनामा दाखिल करने से संबंधित है और यदि कोई प्रत्याशी या उसका प्रस्तावक नामांकन पत्र के साथ लंबित आपराधिक मामलों के बारे में कोई जानकारी देने में विफल रहता है या उसे छुपाता है और यह साबित हो जाता है तो प्रत्याशी को छह महीने की कैद या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.

अपीलार्थी उइके ने कहा था कि बीजेपी नेता ने दो आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं करके हलफनामे में गलत जानकारी दी, लेकिन इसके बावजूद निचली अदालत और हाईकोर्ट ने कहा कि इसमें पहली नजर में कोई मामला नहीं बनता है. उन्होंने कहा कि प्रत्याशी के लिए सभी आपराधिक मामलों की जानकारी देना कानूनी रूप से अनिवार्य है. (इनपुट: एजेंसी)