मुंबई (महाराष्ट्र): राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार विजेता ज़ेन सदावर्ते ने कहा कि महिला दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मराठी में भाषण नहीं दिए जाने की वजह से उन्हें शिवसेना नेताओं द्वारा भाषण देने से रोक दिया गया. उन्होंने कहा कि मुझे नहीं मालूम की मराठी कैसे बोली जाती है. उन्होंने कहा कि जब मैंने हिंदी और अंग्रेजी में बात की, तो हर किसी के पास मेरा संदेश पहुंचा. लेकिन मुझे नहीं पता कि मंच पर लोगों के साथ क्या हुआ था. वे गुस्सा हो गए और मुझ पर हमला किया. मंच पर पैनल में शिवसेना नेता भी मौजूद थे. Also Read - राज ठाकरे का आरोप, बोले- शिवसेना कोरोना वायरस रोकने के बजाय लोगों को धमका रही है


सदावर्ते ने कहा “मैंने भारत को प्रभावित करने वाले कई मुद्दों के बारे में बात की, जो देश में गलत हो रहे हैं. जैसे, शनिवार और रविवार को बच्चों को मध्यान्ह भोजन नहीं दिया जाता है. वे मुद्दे हैं जिनके बारे में मैंने बात की है. मैंने ट्रांसजेंडर को क्षैतिज आरक्षण दिए जाने के बारे में बात की है.” उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि वहां मौजूद विधायकों और शिवसेना के प्रतिनिधियों के साथ क्या हुआ. उन्होंने मुझे अपमानित करना शुरू कर दिया. वे मंच पर झूठ बोलने लगे कि हमने आरक्षण दिया है और दावा किया है कि वे राज्य के हैं और बेहतर जानते हैं.” .

सदावर्ते ने कहा कि अपनी इच्छा से किसी भी भाषा में बोलने का अधिकार दिया गया है. उन्होंने आगे कहा कि वे लोग हमारे अभिव्यक्ति के अधिकार का शोषण कर रहे हैं. मेरे पास अंग्रेजी और हिंदी दोनों संघीय भाषा में बोलने का अधिकार हैं. उन्होंने मुझसे कहा कि ‘अगर आप भारत में रहना चाहते हैं, तो आपको मराठी सीखने की जरूरत है.’ उन्होंने कहा कि मैं जिस भाषा को बोलना चाहती हूं, उसे बोलना मेरा अधिकार है.