मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), कांग्रेस और शिवसेना के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए बातचीत कर रही थी, लेकिन शनिवार सुबह भाजपा के देवेंद्र फडणवीस और शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने क्रमश: मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर सभी को अचंभे में डाल दिया. अजीत पवार के इस फैसले को राकांपा के कई नेताओं ने ‘पीठ में छुरा भोकना’ बताया है.

नाम न छापने की शर्त पर राकांपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि भाजपा राज्य में गठबंधन की सरकार बनाने के लिए नेताओं को लुभाने का पूरा प्रयास कर रही थी. लेकिन शरद पवार भाजपा के साथ जाने को तैयार नहीं थे, क्योंकि उनका यह कदम उनके लिए राजनीतिक आत्महत्या जैसा होता. नेता ने आगे बताया कि संसद में प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई 50 मिनट की बैठक में वहां मौजूद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शरद पवार को मनाने की पूरी कोशिश की थी.

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किसी भी विधायक को कहीं अन्यत्र नहीं भेजा
राकांपा नेता ने आगे बताया कि लेकिन उन्होंने मना कर दिया. वहीं तीनों पार्टियों के बीच सरकार बनाने को लेकर हो रही बातचीत का हिस्सा रहे एक अन्य नेता ने कहा कि जब शिवसेना और कांग्रेस अपना घर बचाने के लिए अपने विधायकों को जयपुर के होटलों और रिसॉर्ट में छिपाए रखा, तब शरद पवार ने अपने भतीजे पर भरोसा किया और किसी भी विधायक को कहीं अन्यत्र नहीं भेजा.

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भतीजे पर भरोसा कर रहे थे शरद पवार
उन्होंने आगे कहा कि शरद पवार अपने भतीजे पर भरोसा कर रहे थे और यही वजह था कि उन्होंने अजीत को पार्टी का सीएलपी नेता बनाया. उन्होंने आगे कहा कि मुंबई आने के बाद नेहरू सेंटर में हुई तीनों पार्टियों की बैठक में भी वह मौजूद रहे. नेता ने कहा कि उनके भतीजे अजीत पवार का यह कदम शरद पवार की पीठ में छुरा भोंकने के समान है.