पुणे: केंद्रीय मंत्री एवं बीजेपी नेता नितिन गडकरी ने रविवार को कहा कि भाजपा 2019 का लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लड़ेगी. गडकरी ने इसके साथ ही मीडिया पर उनके द्वारा पुणे में एक कार्यक्रम में की गई टिप्पणी को तोड़ मरोड़कर पेश करने का आरोप भी लगाया. गडकरी ने स्पष्ट किया कि वह किसी दौड़ या प्रतिस्पर्धा में नहीं हैं और भाजपा को अगले आम चुनाव में उचित बहुमत मिलेगा. इससे पहले दिन में गडकरी ने ट्विटर पर यह दावा किया कि कुछ विपक्षी दल और मीडिया के एक वर्ग ने उनके बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया है. उन्होंने कहा, यह बहुत स्पष्ट है कि भाजपा 2019 आमचुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लड़ेगी और पार्टी को उचित बहुमत मिलेगा.

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ”पिछले कुछ दिनों में मैंने गौर किया है कि मेरी पार्टी और मुझे नुकसान पहुंचाने के लिए कुछ विपक्षी दल और मीडिया के एक वर्ग की ओर से मेरे बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का अभियान चलाया जा रहा है और उसे संदर्भ से अलग इस्तेमाल किया जा रहा है और राजनीति से प्रेरित निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं.”

ऐसे आक्षेपों का कई बार खंडन कर चुके
गडकरी ने कहा कि वह ऐसे आक्षेपों का कई बार खंडन कर चुके हैं और एक बार फिर ऐसी दुर्भावनापूर्ण और शरारतपूर्ण रिपोर्ट पेश किए जाने की निंदा करते हैं. गडकरी ने ट्वीट किया, ” मैं एक बार फिर स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मेरे और भाजपा नेतृत्व के बीच दरार पैदा करने की साजिश कभी सफल नहीं होगी.”

मीडिया के एक वर्ग ने मेरे बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया
गडकरी ने कहा, मराठी में दिया मेरा पूरा भाषण उपलब्ध है. मैंने जो कुछ भी कहा वह बैंकिंग के संदर्भ में था और मैंने न तो किसी चुनाव या न ही किसी नेता के बारे में कोई उल्लेख किया. उन्होंने कहा, दुर्भाग्य से मीडिया के एक वर्ग ने मेरे बयान को वर्तमान चुनावी राजनीति से जोड़कर और अपनी खुद की टिप्पणी जोड़कर उसे तोड़ मरोड़कर पेश किया. गडकरी ने कहा कि यदि पत्रकारों का अपना खुद का एजेंडा हो तो वे अपने नाम से लिखने के लिए मुक्त हैं. उन्होंने कहा, लेकिन जो चीज मैंने नहीं कही उसे मेरे बयान से जोड़ना अच्छी बात नहीं है.

 कहा था- नेतृत्व में असफलता को स्वीकार करने की प्रवृत्ति होनी चाहिए
गडकरी का यह बयान शनिवार की उनकी उस टिप्पणी की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि नेतृत्व को हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. गडकरी की यह टिप्पणी हाल में हुए मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनाव के बाद आई. बीजेपी के सीनियर नेता गडकरी नेता कहा था कि सफलता का श्रेय लेने के लिए लोगों में होड़ रहती है, लेकिन विफलता को कोई स्वीकार नहीं करना चाहता. ”नेतृत्व में हार और असफलता को स्वीकार करने की प्रवृत्ति होनी चाहिए.”

टिप्पणी का कोई राजनीतिक मकसद नहीं था
गडकरी ने रविवार को पुणे में मीडियाकर्मियों से कहा कि उनकी टिप्पणी का कोई राजनीतिक मकसद नहीं था. उन्होंने दावा किया कि मीडिया के एक वर्ग ने पुणे डिस्ट्रिक्ट अर्बन कोआपरेटिव बैंक्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में उनकी ओर से की गई टिप्पणी को तोड़ मरोड़कर पेश किया.

यदि कोई कुछ लिख रहा है तो उससे मैं कैसे जुड़ता हूं?
महाराष्ट्र के एक कृषि कार्यकर्ता किशोर तिवारी द्वारा आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को लिखे गए पत्र के बारे में पूछे जाने पर जिसमें उन्होंने कथित रूप से सुझाव दिया है कि यदि भाजपा 2019 का चुनाव जीतना चाहती है तो पार्टी नेतृत्व में बदलाव होना चाहिए, केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपने विचार रखने का अधिकार है. भाजपा के पूर्व अध्यक्ष गडकरी ने कहा, यदि कोई कुछ लिख रहा है तो उससे मैं कैसे जुड़ता हूं? उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वह किसी दौड़ या  प्रतिस्पर्धा में नहीं हैं.