मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय को बताया कि कोविड-19 महामारी के बीच सड़क विक्रेताओं और हॉकरों को काम शुरू करने की अनुमति देने का उसका कोई इरादा नहीं है क्योंकि उनका विनियमन करना संभव नहीं है. सरकार ने मनोज ओसवाल द्वारा दायर जनहित याचिका के जवाब में शपथपत्र दायर किया जिससे कोविड-19 के चलते ठप हुई सड़क विक्रेताओं और हॉकरों की आजीविका को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.Also Read - Nawab Malik ने फिर कहा, समीर वानखेड़े के मालदीव दौरे की जांच करें, उगाही का पूरा खेल सामने आ जाएगा

ओसवाल ने अपनी याचिका में दलील दी कि क्योंकि होटलों और रेस्तराओं को काम करने की अनुमति मिल गई है, इसलिए सड़क विक्रेताओं को भी अपना काम शुरू करने की अनुमति मिलनी चाहिए. सरकार ने अपने शपथपत्र में कहा, ‘‘वर्तमान जमीनी हकीकत और कोविड-19 महामारी पर विचार करते हुए राज्य सरकार सड़क विक्रेताओं या हॉकरों को लॉकडाउन के बीच में और बाद में काम शुरू करने की अनुमति नहीं देना चाहती.’’ Also Read - 7th Pay Commission: महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम ने दिवाली से पहले 95,000 कर्मचारियों को दिया गिफ्ट, DA बढ़ाकर किया 17 फीसदी

आपदा प्रबंधन, राहत एवं पुनर्वास विभाग के सचिव किशोर निम्बाल्कर द्वारा दायर शपथपत्र में कहा गया कि सड़क विक्रेता और हॉकर असंगठित क्षेत्र की श्रेणी में आते हैं और इसलिए उनके कारोबार को विनियमित करना बहुत मुश्किल है. अदालत ने पिछले महीने सरकार से कहा था कि वह इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे. Also Read - Maharashtra Red Light Area: महाराष्ट्र के इस इलाके में वेश्यावृत्ति पर लगा प्रतिबंध

(इनपुट भाषा)