नई दिल्ली: लंबे समय से बीजेपी की सहयोगी रही शिवसेना से पिछले करीब 4 सालों से बढ़ती राजनीतिक दूरी के बीच शिवसेना ने कई बार कांग्रेस की तारीफ की है. अब इसी माहौल के बीच कांग्रेस कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को जन्मदिन की बधाई दी है.

कांग्रेस प्रेसिडेंट गांधी ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा, ‘ उद्धव ठाकरे जी को जन्मदिन की बधाई. मैं उनकी अच्छी सेहत और खुशहाली की कामना करता हूं.’ बता दें कि हाल के दिनों में कई मौकों पर शिवसेना राहुल गांधी की तारीफ करती नजर आई है. पिछले दिनों संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर गांधी के भाषण की भी शिवसेना ने तारीफ की थी.

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58वें जन्मदिन से पहले पार्टी के मुखपत्र में इंटरव्यू में ये कही थी बात
बीते 23 जुलाई को शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा था कि गाय की रक्षा के नाम पर भारत अब विश्व में महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देश बन गया है और सभी को इसके लिए शर्मिदा होना चाहिए. उद्धव ने 27 जुलाई को अपने 58वें जन्मदिन से पहले पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ और ‘दोपहर का सामना’ को दिए एक विस्तृत साक्षात्कार में कहा, “जी हां, बिल्कुल, हमें हमारी गाय माता की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन मेरी मां का क्या? यह हिंदुत्व नहीं है.” सोमवार को उनके साक्षात्कार का पहला हिस्सा प्रकाशित हुआ है.

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25 वर्षो से शिवसेना और बीजेपी सहयोगी
ठाकरे ने कहा कि पिछले 25 वर्षो से शिवसेना और बीजेपी सहयोगी हैं, क्योंकि दोनों हिंदुत्व की विचारधारा, हिंदुओं के दर्जे, राष्ट्रीय हित और देश की सुरक्षा समेत अन्य मुद्दों पर समान राय रखते हैं. ठाकरे ने कहा, “लेकिन हिंदुत्व क्या है, मैं मेरे पिता शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बालासाहेब ठाकरे से अक्सर यह पूछता था. उनका जवाब होता था कि राष्ट्रीयता हमारा हिंदुत्व है. हम नहीं चाहते कि हिंदू केवल मंदिर में जाकर घंटियां बजाएं, चोटी रखें और जनेऊ धारण करें. बालासाहेब के हिंदुत्व के विचारों को अब प्रचारित और लागू किया जाना चाहिए.”

कोई भी हमारे कंधे पर रखकर बंदूक नहीं चला सकता 
लोकसभा में बीजेपी के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के दौरान शिवसेना ने सदन में अनुपस्थित रहने का निर्णय लिया था. उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव सत्तारूढ़ दल द्वारा लोगों के साथ किए गए धोखे का परिणाम है ठाकरे ने कहा, “सामान्य तौर पर विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाता है, लेकिन यहां पहल तेलुगू देशम पार्टी ने की, जो कि सत्तारूढ़ पार्टी की सहयोगी थी. उसका विश्वास सरकार से उठ गया था.” शिवसेना के रुख पर सफाई देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी हमारे कंधे पर रखकर बंदूक नहीं चला सकता और न ही शिवसेना किसी और के कंधे पर बंदूक रखकर चलाएगी. (इनपुट- एजेंसी)