नागपुर: राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की तथ्यान्वेषी समिति की अंतिम रिपोर्ट में महाराष्ट्र में पिछले महीने मारी गई बाघिन अवनि को मारने के तौर तरीकों पर सवाल खड़े किए गए हैं. समिति ने कहा है कि यवतमाल जिले में दो नवंबर को इस बाघिन को जिस टीम ने मारा, उसके और पशुचिकित्सकों के बीच कोई संचालन समन्वय नहीं था. इस बाघिन को बेहोश करने वाले डार्ट (नुकीली चीज) को भी अनधिकृत तरीके से दागा गया.

समिति ने यह भी कहा है कि जब निशानेबाज असगर अली खान ने बाघिन को मारा, तब इस अभियान के समय पशुचिकित्सा संबंधी दवा का काम भी अनधिकृत व्यक्तियों ने संभाला.

राज्य सरकार टी 1 (सरकारी नाम) नामक इस बाघिन की मौत को लेकर आलोचनाओं से घिर गई है. माना जाता है कि यवतमाल में इस बाघिन ने पिछले दो सालों में 13 लोगों की जान ले ली थी. इस बाघिन के मारे जाने पर पशुप्रेमियोंं और वन्यजीव संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताई.

इस बाघिन की मौत की जांच के लिए आठ नवंबर को सेवानिवृत वन अवर प्रधान संरक्षक ओ. पी. कालेर और एनजीओ वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के उपनिदेशक जोस लुईस की दो सदस्यीय समिति बनाई गई थी. समिति ने 28 नवंबर को प्राधिकरण के सदस्य सचिव को रिपोर्ट सौंपी थी.

एनटीसीए की रिपोर्ट के बारे में महाराष्ट्र के वन मंत्री सुधीर मुनगट्टीवार ने मुंबई में कहा कि उन्होंने रिपोर्ट नहीं देखी है और वह उसके निष्कर्षों पर कुछ नहीं कह सकते. उन्होंने कहा, ”मैं उसे देख लूं, उसके बाद ही उसपर मैं कुछ टिप्पणी कर पाऊंगा.”