मुंबईः मुंबई कांग्रेस के नेता संजय निरुपम ने शुक्रवार को कहा कि पार्टी अब जमीनी स्तर पर प्रतिक्रिया नहीं ले रही है और ‘‘राज्य के प्रभारी एआईसीसी महासचिव को काफी प्रभावशाली बना दिया गया है.’’ निरुपम ने बृहस्पतिवार को घोषणा की थी कि वह 21 अक्टूबर को प्रस्तावित विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार नहीं करेंगे. उन्होंने कहा था कि उन्हें ‘‘दरकिनार’’ कर दिया गया है जबकि उन्होंने चार वर्षों तक पार्टी की मुंबई इकाई का अध्यक्ष पद संभाला था.

लोकसभा चुनावों से पहले मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाये गए निरुपम ने से कहा कि विधानसभा चुनाव के लिए टिकटों के वितरण में उनकी राय पर विचार नहीं किया गया. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे विधानसभा चुनाव प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं दी गई. मेरे लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में ही (विधानसभा) टिकट के बंटवारे के दौरान मेरे विचारों पर ध्यान नहीं दिया गया.’’ कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी में ‘‘व्यवस्थागत खामी’’ है. उन्होंने कहा, ‘‘जमीनी स्तर के (कार्यकर्ताओं) से समानांतर प्रतिक्रिया लेने की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है.’’

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उन्होंने कहा, ‘‘राज्य के प्रभारी एआईसीसी महासचिव का निर्णय अंतिम है. एआईसीसी महासचिव को सर्वशक्तिमान बना दिया गया है. वह भी पक्षपाती हो सकते है.’’ निरुपम ने कहा कि उन्होंने मुंबई उत्तर-पश्चिम लोकसभा सीट के तहत आने वाली वर्सोवा विधानसभा सीट के लिए एक नाम दिया था. निरुपम को मुंबई उत्तर-पश्चिम लोकसभा सीट पर 2.6 लाख वोटों से हार का सामना करना पड़ा था.

उन्होंने कहा, ‘‘पार्टी ने (बलदेव खोसा) के नाम को अंतिम रूप दिया है जो 2014 के विधानसभा चुनाव में तीसरे स्थान पर आये थे और पिछले पांच वर्षों से सक्रिय नहीं थे.’’ उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा अपने अभियान में इतनी आक्रामक है और हमें ऐसे उम्मीदवारों को चुनने की जरूरत है जो इस आक्रामकता का मुकाबला कर सकें.’’ कांग्रेस सूत्रों ने निरुपम के आरोपों को आधारहीन बताते हुए कहा है कि खोसा तीन बार विधायक रहे हैं और लंबे समय से पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता रहे है.