कोल्हापुर: भाजपा के खिलाफ राष्‍ट्रीय स्‍तर का महागठबंधन बनाने की विपक्षी पार्टियों की रणनीति फिलहाल सफल होती नहीं दिख रही. लोकसभा चुनावों के लिए एक साथ आने को तैयार ये पार्टियां राज्‍यों में एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी हैं. गठबंधन के नेता को लेकर भी मतभेद हैं. इन कमियों को भांपते हुए विपक्ष भी शायद अब अपनी रणनीति बदल रहा है. इसका संकेत शुक्रवार को राकांपा अध्‍यक्ष शरद पवार ने दिया जब उन्‍होंने कहा कि विपक्ष भाजपा के खिलाफ राज्‍य स्‍तरीय गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहा है.

राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने शुक्रवार को कहा कि विपक्षी पार्टियां राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन नहीं बल्कि राज्य स्तरीय भाजपा विरोधी गठबंधन बनाने का प्रयास कर रही हैं. इस महीने के शुरू में तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा से मुकाबले के लिए राष्ट्रीय स्तर का गठबंधन बनाने के अपने प्रयास के तहत दिल्ली में पवार और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला से मुलाकात की थी.

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पवार ने कहा, ‘‘हम कोई राष्ट्रीय स्तर का महागठबंधन बनाने का प्रयास नहीं कर रहे हैं. हमारा प्रयास राज्य आधार पर गठबंधन बनाना और प्रत्येक राज्य में प्रमुख राजनीतिक दल को प्राथमिकता देना है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसके लिए हम 10 दिसम्बर को दिल्ली में बैठक करने वाले हैं. उक्त बैठक में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) इस्तेमाल के मुद्दे पर भी चर्चा की जाएगी.’’

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कुछ विपक्षी दलों ने ईवीएम के इस्तेमाल पर आपत्ति जतायी है और आरोप लगाया है कि उनसे छेड़छाड़ की जा सकती है. पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश सरकारों द्वारा सीबीआई को ‘‘आम मंजूरी’’ वापस लेने के निर्णय के बारे में पूछे जाने पर पवार ने कहा, ‘‘यदि भाजपा नीत केंद्र सरकार ने सीबीआई का दुरूपयोग करना जारी रखा तो अन्य राज्य भी इसका अनुसरण कर सकते हैं.’’

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उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए कहा कि स्थिति गंभीर है. राममंदिर के मुद्दे पर उन्होंने कहा, ‘‘विकास को लेकर बोलने को कुछ है नहीं. इसलिए भाजपा आगामी चुनाव में मंदिर मुद्दे का इस्तेमाल करने का प्रयास कर रही है.’’