नई दिल्ली| शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और केंद्र सरकार को फिर निशाने पर लिया है. केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए शिवसेना ने कहा है कि उसने नोटबंदी का चाबुक चलाकर कर्ज में दबे किसानों को गहरी निराशा में धकेला और उनके खेतों को बर्बाद हो जाने दिया. शिवसेना ने कहा कि कई साल बाद पिछले साल का मानसून किसानों के लिए उम्मीदें लेकर आया था और फसल उत्पादन भी अच्छा हुआ था लेकिन नोटबंदी ने उन्हें फसलों को कम दाम पर बेचने को मजबूर कर दिया. किसानों को फसल की लागत भी नहीं मिल पाई और नतीजा यह हुआ कि कर्ज से दबे किसान घाटे में चले गए.Also Read - Parliament Monsoon Session 2021: राज्यसभा में हंगामा कर रहे TMC के 6 सांसद निलंबित, सभापति ने पहले किया था आगाह

ऐसे समय में जब उद्योग जगत और सेवा क्षेत्र को विकास के लिए एक के बाद एक प्रोत्साहन मिल रहे हैं, ऐसे में कृषि क्षेत्र के प्रति सरकार की बेपरवाही पर शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में सवाल उठाया. शिवसेना ने कहा कि सरकार कृषि क्षेत्र के विकास के वादे के साथ सत्ता में आई थी लेकिन आज वह इस क्षेत्र को कर लगा देने के नाम पर डराती रहती है. Also Read - बीजेपी ने कहा- राहुल गांधी कांग्रेस शासित राज्यों में बलात्कार के मामलों पर नहीं बोलते हैं, न ट्वीट करते हैं

शिवसेना ने यह भी कहा कि पंचायत से लेकर नगर निगमों तक के चुनाव जीतना आसान है और यदि आपके पास पैसा है तो आप चांद पर हो रहा चुनाव भी जीत सकते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जनता आपकी नौकर है. किसानों को सिर्फ वोटबैंक नहीं मान लेना चाहिए. शिवसेना ने एक सवाल यह भी उठाया कि कच्चे तेल की कीमतें अपने निचले स्तर पर आ गईं लेकिन क्या महंगाई कम हुई? Also Read - बीजेपी नेताओं से मिलने के बाद क्या अब भी ओवैसी के साथ गठबंधन करेंगे ओमप्रकाश राजभर, कही ये बात

सामना में कहा गया कि हम यह जानना चाहते हैं कि जब भाजपा चुनाव में करोड़ों रुपये खर्च सकती है, तो फिर वह कर्जमाफी में हिचकिचा क्यों रही है? शिवसेना ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री कहते हैं कि वह केवल असली किसान नेताओं से ही बात करेंगे, तो सरकार की ओर से भी असली किसानों को ही असल किसान नेताओं से बातचीत करनी चाहिए. लेकिन, क्या आपकी सरकार में एक भी असली किसान हैं?