मुंबई: महाराष्ट्र भाजपा के वरिष्ठ नेता आशीष शेलार ने सोमवार को कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी शिवसेना ने उन लोगों के साथ गठजोड़ किया है, जिनके झंडों में ”चांद और सितारे” हैं. बता दें कि आधा चांद और पांच सितारे इस्लाम के प्रतीक हैं, जिनका अर्थ प्रगति, रोशनी और ज्ञान से है.

शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के सोमवार के संस्करण में प्रकाशित ठाकरे के इंटरव्‍यू पर शेलार टिप्पणी कर रहे थे. साक्षात्कार में ठाकरे ने दावा किया कि वह भाजपा से चांद- तारे नहीं मांग रहे थे, बल्कि मुख्यमंत्री के कार्यकाल के बराबर बंटवारे के वादे को पूरा करने के लिए कह रहे थे.

शिवसेना प्रमुख ठाकरे ने सामना में कहा, ”जो वादे किए जाते हैं उन्हें पूरा किया जाना चाहिए. वादा तोड़ने पर उदासी और गुस्सा होता है और फिर मेरे पास कोई विकल्प नहीं था. मुझे नहीं पता कि भाजपा निराशा से उबरी है या नहीं. मैंने कौन सी बड़ी चीज मांगी थी… चांद या तारे? मैंने उन्हें लोकसभा चुनावों से पहले बनी सहमति के बारे में याद दिलाया.”

पलटवार करते हुए शेलार ने कहा, ”मुझे नहीं पता कि उन्होंने चांद मांगा था या नहीं. लेकिन लगता है कि वे (शिवसेना) उन लोगों के साथ बैठे हैं, जिनके झंडे पर चांद सितारे हैं.” शेलार ने यह भी कहा कि शिवसेना में काफी संख्या में ऐसे विधायक हैं जो दूसरे दलों से आए हैं.

शेलार ने बयान के लिए माफी मांगी
महाराष्ट्र भाजपा के वरिष्ठ नेता आशीष शेलार ने प्रदेश की उद्धव ठाकरे सरकार के खिलाफ दिए गए अपने बयान के लिए सोमवार को माफी मांग ली. शेलार ने संसद में पारित कानून लागू करने से इंकार करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा था कि राज्य किसी के बाप की जागीर नहीं है.

सीएए का समर्थन किया था, एनआरसी का नहीं: मुख्यमंत्री ठाकरे 
शिवसेना की ओर से रविवार को जारी एक वीडियो क्लिप में मुख्यमंत्री ठाकरे ने कहा कि उन्होंने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) का समर्थन किया था, लेकिन राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) का नहीं. शेलार ने यह टिप्पणी रविवार को ठाणे जिले के वसई में की थी.

आलोचना के बाद शेलार ने माफी मांगी
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री शिवसेना के उदय सामंत और राकांपा के जितेंद्र अव्हाड़ द्वारा इस टिप्पणी की आलोचना किए जाने के बाद शेलार ने माफी मांगते हुए कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं थी. उन्होंने माफीनामे में कहा, ”यदि किसी को चोट पहुंची है, तो मुझे खेद है. लेकिन क्या, संवैधानिक तरीके से पारित कानून को लागू करने से इनकार करना असंवैधानिक नहीं है.”