देशभक्ति को लेकर शिवसेना ने बीजेपी पर किया हमला, कहा अपनी सहुलियत के लिए भाजपा बदल रही है इसकी परिभाषा

देशभक्त बनाम देशद्रोह की बहस में अब शिवसेना भी कूद पड़ी है

Published date india.com Published: March 2, 2017 1:10 PM IST
Shiv Sena attacks BJP on Nationalism | देशभक्ति को लेकर शिवसेना ने बीजेपी पर किया हमला, कहा अपनी सहुलियत के लिए भाजपा बदल रही है इसकी परिभाषा
प्रतीकात्मक चित्र

एक और जहाँ भाजपा और शिवसेना मुंबई में साथ आने की बात चल रही हैं तो वहीँ शिवसेना का मुखपत्र सामना ने अपने तीखे तेवर बरक़रार रखे हैं | देशभक्त बनाम देशद्रोह की बहस में अब शिवसेना भी कूद पड़ी है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के ज़रिये बीजेपी पर हमला बोला है। बीजेपी की देशभक्ति और देशद्रोही की परिभाषा अपनी सहूलियत के हिसाब से बदलती है ऐसा आरोप सामना में लगाया गया है। इसके अलावा कश्मीर में पीडीपी के साथ गठबंधन पाक रहता है मगर कांग्रेस से साथ गठबंधन नापाक कैसे हो जाता है यह सवाल भी पूछा गया है। यह भी पढ़े: मुंबई का मेयर बनाने के लिए बीजेपी के समर्थन की ज़रूरत नहीं- शिवसेना

सामना के सम्पादकीय ‘देशभक्तिचे मुखवटे’ (देशभक्ति के मुखौटे) में लिखा है की बीजेपी, देशभक्ति की परिभाषा अपने सहूलियत के हिसाब से बदल नहीं सकती। लोकतंत्र को लेकर अभी तक हमारे देश में असमंजस की स्थिति है। इसी प्रकार से देशभक्ति की परिभाषा भी देश में साफ़ नहीं है। अगर किसी व्यक्ति ने आपकी इच्छा के अनुसार काम किया तो वह देशभक्त और अगर उसने नहीं किया तो वह देशद्रोही ऐसी ज़बरदस्ती करने की ज़रूरत नहीं है।

सामना में आगे लिखा है कि, पुरे देश में देशभक्ति को लेकर जो सियासत चल रही है वह बेहद घातक है। पार्टी अपनी सहूलियत के लिए इसका इस्तेमाल कर रही है। बीजेपी के अनुसार, जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार देशद्रोही है मगर अपने ही विधायक प्रशांत परिचारक के लिए उनकी राय अलग है । बता दें कि, परिचारक ने भाषण के दौरान कहा था की, “जवान सालभर सीमा पर रहते है मगर यहां उनके पत्नी को बच्चे हो जाते है।” जवानों के परिवार के चरित्र पर सवाल उठाना बेहद गंभीर बात है मगर इस विषय पर बीजेपी से किसी ने भी बयान नहीं दिया है।

कन्हैया कुमार को देशद्रोह के आरोप में जेल भेजा गया मगर अबतक पुलिस को उसके खिलाफ साबुत नहीं मिला है। कन्हैया ने देश विरोधी नारे लगाए इस बात का प्रमाण पुलिस एक साल बाद भी जुटा नहीं पाई है। मगर इस मुद्दे को लेकर साल भर पहले कम्युनिस्ट विद्यार्थी संघठन और एबीवीपी के बीच ज़ोरदार संघर्ष हुआ। इसी एबीवीपी ने अपने ही विधायक परिचारक के बयान का विरोध कर रहे संघठनो को धमकी दी।

अफ़ज़ल गुरु के समर्थन में नारे लगाना अगर देशद्रोह है, तो जवान की पत्नी के चरित्र पर सवाल उठाना भी गंभीर है। कांग्रेस के साथ गठबंधन अगर अभद्र है तो फिर जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान प्रेमी महबूबा मुफ़्ती के साथ गठबंधन को भी तो गलत मानो। नोटबंदी का विरोध करने वाले देशविरोधी है ऐसा सरकार कहती है। मगर नोटबंदी के बाद भी आतंकी गतिविधियां नहीं रुकी है और जवानों को अब भी बलिदान देना पड रहा है, सरकार इसे रोकने में नाकामयाब साबित हुई है, यह कौनसी देशभक्ति के लक्षण है?

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