नई दिल्ली: ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने शिवसेना के उस रुख का स्वागत किया है जिसमें उसने शिक्षा में मुस्लिमों को 5 प्रतिशत आरक्षण की मांग की वकालत की थी. गौरतलब है कि सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना प्रमुख उधव ठाकरे ने कहा था कि मराठों के आलावा धांगड़ कोली और मुस्लिमों को भी आरक्षण मिलना चाहिए. ठाकरे ने कहा था कि आरक्षण के इस मुद्दे पर पार्टी केंद्र और राज्य सरकार का समर्थन करेगी. मुस्लिमों को आरक्षण के सवाल पर उधव ने कहा कि अगर मुस्लिमों की कोई जायज मांग है तो उसे पूरा किया जाना चाहिए. Also Read - राज ठाकरे का आरोप, बोले- शिवसेना कोरोना वायरस रोकने के बजाय लोगों को धमका रही है

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शिवसेना के इस कदम का स्वागत करते हुए ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के विधायक इम्तियाज जलील का कहना है कि यह साकारात्मक सोच है. बीजेपी को इस बारे में सोचना चाहिए. खासतौर पर ऐसे समय में जब बीजेपी के कुछ नेता मुस्लिमों को निशाना बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि मुस्लिमों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण की मांग पर बॉम्बे हाईकोर्ट भी अपनी मुहर लगा चुका है. यह बहुत ही अफसोसजनक है कि राज्य सरकार आरक्षण के इस फैसले को लागू नहीं कर पाई है. Also Read - महिला दिवस पर मराठी में भाषण नहीं देने पर उग्र हुए शिवसेना नेता, राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार विजेता पर किया हमला

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गौरतलब है कि शिवसेना ने महाराष्ट्र सरकार से मराठा, धांगड़ और कोली को आरक्षण देने का अनुरोध करते हुए कहा कि ऐसा ना करने से राज्य ‘बनाना रिपब्लिक’ बन जाएगा. राजनीतिक रूप से प्रभावशाली मराठा समुदाय नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है. राज्य की आबादी का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा मराठा समुदाय का है. पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के एक संपादकीय में लिखा था कि एक बार मराठा समुदाय को आरक्षण दे दिया गया तो दूसरे लोग भी सड़कों पर उतरेंगे और एक नई समस्या खड़ी हो जाएगी.

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इसमें कहा गया है, ‘सरकार को एक साथ सभी समुदायों की मांगों पर एक फैसला लेना चाहिए. भाजपा ने चुनावों से पहले धांगड़ को आरक्षण देने का वादा किया था. संपादकीय में कहा गया है कि अगर ये सभी समुदाय सड़क पर उतर आएंगे और एक के बाद एक आरक्षण की मांग करेंगे तो महाराष्ट्र को ‘बनाना रिपब्लिक’ बनने में देर नहीं लगेगी. इसमें कहा गया है कि राज्य को मराठा, धांगड़ और कोली को आरक्षण देने के लिए सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित करना चाहिए और इसे मंजूरी के लिए केंद्र के पास भेजना चाहिए.