मुंबई. सुप्रीम कोर्ट के चार न्यायाधीशों द्वारा मामलों के चुनिंदा तरीके से आवंटन का मुद्दा उठाए जाने के बाद शिवसेना ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग लोकतंत्र की दुहाई देते हैं असल में वही उसे कमजोर कर रहे हैं. पार्टी ने कहा कि जो लोग पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर न्यायिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाते थे, वे आज सत्ता में हैं. साथ ही पार्टी ने कहा कि उनका (इंदिरा) शासन ज्यादा मानवीय और लोकतांत्रिक लगता था. Also Read - याहू पर 2020 में सबसे ज्यादा सर्च किए गए सेलेब्स में सुशांत पहले नंबर पर, पीएम मोदी समेत ये हस्तियां हैं टॉप 10 में- See List

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शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र सामना के एक संपादकीय में कहा कि देश का दम घुंट रहा था और न्यायाधीशों के आवाज उठाने के बाद अब वह आसानी से सांस ले पा रहा है. भारत की न्यायापालिका को लेकर पिछले शुक्रवार से खलबली मची हुई है जब सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ न्यायाधीश- न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एम बी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ ने संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर मामलों के आवंटन का मुद्दा उठाया था. Also Read - गुजरात से BJP के राज्यसभा सांसद अभय भारद्वाज का कोरोना संक्रमण से निधन, PM मोदी ने जताई संवेदना

शिवसेना ने कहा कि यह चार न्यायाधीशों द्वारा लोकतंत्र की मजबूती के लिए उठाया गया एक साहसी कदम है. राजग की इस सहयोगी पार्टी ने सवाल उठाया, क्या यह प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के दवाब में आने और इन चार निष्पक्ष न्यायाधीशों को चुनिंदा सुनवाईयों से दूर रखने के संबंध में है? पार्टी ने कहा कि जो लोग इंदिरा गांधी पर न्यायिक मामलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाते थे, वे अब सत्ता में हैं. और अगर कई संवैधानिक पदों पर उठ रहे सवालों को देखा जाए तो इंदिरा का शासन ज्यादा मानवीय और लोकतांत्रिक मालूम होता है. शिवसेना ने कहा, आप (केंद्र) लोकतंत्र की बात करते हैं लेकिन असल में आप इसे कमजोर कर रहे हैं और देश में फिलहाल यही हो रहा है.