नई दिल्‍ली: महाराष्‍ट्र में 14 दिन बाद भी बीजेपी और शिवसेना के बीच सरकार बनाने को लेकर मामला फंसा हुआ है. महायुति के दोनों दलों के बीच सरकार बनाने को लेकर सस्‍पेंस बरकार है. इस बीच बीजेपी के साथ गठबंधन की सरकार बनाने को लेकर शिवसेना नेता ने बुधवार को कहा कि बीजेपी से न कोई नया प्रस्‍ताव मिला है और ना उन्‍हें भेजा गया है. अब कोई नए प्रस्‍ताव नहीं दिए जाएंगे.

सरकार बनाने को संघ की शरण में पहुंचे देवेंद्र फडणवीस! मोहन भागवत से की मुलाकात

शिवसेना के प्रवक्‍ता व सांसद संजय राउत ने मुंबई में कहा, हम केवल उसी प्रस्‍ताव पर चर्चा करेंगे जो हमारे बीच विधानसभा चुनाव से पहले हुआ था. अब कोई नए प्रस्‍ताव नहीं दिए जाएंगे. चुनाव के पहले बीजेपी और शिवसेना के बीच मुख्‍यमंत्री के पद को लेकर एक समझौता हुआ था और तभी हम चुनाव के लिए गठबंधन को लेकर आगे बढ़े थे.

मुख्यमंत्री पद को लेकर सहमति कब होगी, इस सवाल पर राज्यसभा सदस्य ने कहा, ”चुनाव से पहले ही पद को लेकर सहमति हो गई थी. राउत ने सरकार गठन को लेकर किसी भी नए प्रस्ताव की खबर को खारिज करते हुए कहा कि शिवसेना चुनाव से पहले तय हुई स्थिति पर ही सरकार गठन को राजी होगी.

शिवसेना नेता ने कहा, नए प्रस्ताव पर समय क्यों बर्बाद करें. हम पहले तय हुई बातों पर चर्चा करना चाहते हैं. कोई नया प्रस्ताव न मिला है और न भेजा गया है.

राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने की खबरों पर राउत ने कहा कि हम इसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे. राष्ट्रपति शासन लागू करने की साजिश रचने वाले लोग जनादेश का अपमान कर रहे हैं.

मंगलवार को महाराष्‍ट्र में सरकार बनाने को लेकर सारा दिन सियासी घटनाक्रम चला था, जिसमें मुंबई में मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने निवास पर पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ मीटिंग की थी, इसके बाद वे रात में नागपुर पहुंचे थे और राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की थी. वहीं, कांग्रेस की कार्यकारी अध्‍यक्ष सोनिया गांधी और शरद पवार के बीच मुलाकात हुई थी. आज भी पवार और सोनिया के बीच मीटिंग हो सकती है.

पिछले विधानसभा चुनाव के विपरीत भाजपा और शिवसेना ने यह चुनाव मिलकर लड़ा था. 288 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने इस बार 105 सीटें जीतीं जबकि शिवसेना 56 सीटों पर विजेता रही. मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों दलों के बीच खींचतान जारी है. शिवसेना इस पद के लिए 50:50 का फार्मूला चाहती है, लेकिन भाजपा इस पर तैयार नहीं है.

राज्य में 24 अक्टूबर को चुनाव नतीजों की घोषणा की गई थी, जिसके 13 दिन बाद भी कोई पार्टी सरकार गठन के लिए आवश्यक 145 सीटें नहीं जुटा पाई है.