मुंबई: शिवसेना ने संसद के आगामी मानसून सत्र में प्रश्नकाल नहीं कराये जाने संबंधी केंद्र के कदम का गुरुवार को समर्थन किया और कहा कि कोरोना महामारी के बीच आपात स्थिति के कारण यह निर्णय लिया गया है, जिसे सभी को समझने की आवश्यकता है. Also Read - कोरोना संक्रमित मनीष सिसोदिया को डेंगू भी, प्लेटलेट्स घटने पर LNJP से मैक्‍स अस्‍पताल में शिफ्ट

शिवसेना के नेता संजय राउत ने पत्रकारों से कहा कि सरकार से सवाल करने के लिए अन्य मंच हमेशा उपलब्ध हैं. Also Read - पद्मश्री से सम्मानित परमाणु वैज्ञानिक डॉ. शेखर बसु का कोविड-19 से निधन, PM मोदी ने जताया दुख

लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय की अधिसूचना के अनुसार मानसून सत्र में न तो प्रश्न काल होगा और न ही गैर सरकारी विधेयक लाए जा सकेंगे. कोरोना वायरस के कारण शून्य काल को भी सीमित कर दिया गया है. Also Read - यूपी: 17 साल बाद सहकारी समिति में ख़त्म हुआ मुलायम परिवार का दबदबा, बीजेपी का कब्ज़ा

राउत ने कहा, ”भले ही संसद के मानसून सत्र में प्रश्नकाल नहीं होगा, लेकिन यह समझना महत्वपूर्ण है कि ऐसा क्यों है.” उन्होंने कहा, ”यह एक आपातकालीन स्थिति है. हमें समझने की जरूरत है न कि आलोचना करने की.” उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में राज्य विधानसभा का सत्र केवल दो दिन के लिए बुलाया जाएगा.

मानसून सत्र के दौरान प्रश्नकाल नहीं कराए जाने की कई विपक्षी पार्टियों ने निंदा की है और कुछ नेताओं ने मोदी सरकार पर कोविड-19 महामारी के नाम पर लोकतंत्र की हत्या का प्रयास करने का भी आरोप लगाया है.

एक सवाल के जवाब में राउत ने कहा कि सेना प्रमुख एमएम नरवणे लद्दाख गए हैं, जिससे पता चलता है कि चीन-भारत गतिरोध गंभीर है. उन्होंने कहा, ”यहां तक कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी ट्वीट किया था कि स्थिति 1962 से भी बदतर है.” सेना प्रमुख ने बृहस्पतिवार को लद्दाख के अपने दो दिवसीय दौरे की शुरूआत की है.