मुंबई. भाजपा की अगुवाई वाले राजग में शामिल दूसरे नंबर की पार्टी शिवसेना ने लोकसभा में उप सभापति का पद मांगा है. साथ ही पार्टी ने स्पष्ट किया कि उसकी इस मांग का यह कतई मतलब नहीं है कि वह नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार से असंतुष्ट है. पार्टी ने कहा है कि यह मांग के साथ-साथ राजग में दूसरे सबसे बड़े दल के रूप में शिवसेना का ‘प्राकृतिक अधिकार’ है. शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने बीते गुरुवार को कोल्हापुर में संवाददाताओं से कहा कि उप सभापति पद की मांग करना उनकी पार्टी का अधिकार है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वह भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली सरकार से असंतुष्ट है. पार्टी ने अपनी इस मांग के तहत अपने दल की वरिष्ठ सांसदों में से एक भावना गवाली पाटिल (Bhavana Gawali Patil) का नाम आगे बढ़ाया है.

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भाजपा अगर शिवसेना की मांग पर विचार करती है, तो संसद के निचले सदन के लिए लगातार पांचवीं बार सांसद चुनी गईं भावना गवाली पाटिल 17वीं लोकसभा में उपाध्यक्ष के तौर पर दिखेंगी. भावना पाटिल वर्ष 1999 से लगातार बतौर सांसद चुनकर संसद में पहुंचती रही हैं. महाराष्ट्र की अमरावती यूनिवर्सिटी से मराठी भाषा में स्नातक की डिग्री हासिल करने वाली भावना पाटिल के पास विभिन्न मंत्रालयों की समितियों का सदस्य रहने का लंबा अनुभव है. यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट से चुनाव जीतने वाली भावना पाटिल, शिवसेना के संगठन और अपने संसदीय क्षेत्र में न सिर्फ लोकप्रिय नेत्री हैं, बल्कि उनके सामाजिक कार्यों की फेहरिस्त भी काफी लंबी है.

आपको बता दें कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बीते गुरुवार को अपनी पार्टी की मांग के बाबत भाजपा को यह ‘संकेत’ भी दिए थे कि अगर उन्हें लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद मिल जाता है, तो इसका असर आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव पर नहीं पड़ेगा. कहा, ‘‘इस मांग का असर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के साथ हुए गठबंधन पर नहीं पड़ेगा.’ पार्टी के नेता तथा राज्यसभा के सदस्य संजय राउत ने बताया कि पार्टी की मांग भारतीय जनता पार्टी तक पहुंचा दी गई है. उन्होंने कहा, ‘‘पार्टी ने उप सभापति का पद मांगा है और हमने अपनी मांग भाजपा तक पहुंचा दी है.’’

(इनपुट – एजेंसी)