मुम्बई: महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को बंबई उच्च न्यायालय को बताया कि मुम्बई के सात आश्रय गृहों में करीब 1500 किशोर बुरी हालत में रह रहे हैं. ये बच्चे या तो निराश्रित हैं या किसी अपराध के आरोपी हैं. सरकार के कबूलनामे पर चकित उच्च न्यायालय ने समाज कल्याण विभाग को इन आश्रय गृहों में कर्मचारियों के रिक्त स्थानों को भरने के प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी देने का आदेश दिया. Also Read - बॉम्‍बे हाईकोर्ट के बेल नहीं देने के फैसले के खिलाफ अर्नब गोस्‍वामी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

अदालत में दाखिल सरकारी हलफनामे के अनुसार इन आश्रय गृहों में किशोर घटिया बुनियादी ढांचे, अपर्याप्त कर्मचारियों और बजट आवंटन की समस्याओं से जूझ रहे हैं. हलफनामे में कहा गया है कि चिल्ड्रंस एड सोसायटी द्वारा चलाए जा रहे मुम्बई के सात आश्रय गृहों में जगह की भारी कमी है. हर आश्रय गृह में बच्चों की देखभाल के लिए एक ही परिचारक और दो रसोइये हैं. हलफनामे में उपनगरीय मानखुर्द में विशेष आश्रय गृह में 350 मानसिक रोगियों की दुर्दशा बयां की गई है. Also Read - अर्नब गोस्वामी को राहत नहीं, बॉम्बे हाई कोर्ट ने अंतरिम जमानत देने से इंकार किया

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