नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र के पालघर जिले में अप्रैल के महीने में हिंसक भीड़ द्वारा दो साधुओं सहित तीन व्यक्तियों की कथित रूप से पीट पीट कर हत्या के मामले की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो और एनआईए से कराने के लिये दायर याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को राज्य सरकार से जवाब मांगा. न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमणियन की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से इस मामले की सीबीआई और एनआईए से जांच के लिये दो याचिकाओं पर सुनवाई के बाद महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया. न्यायालय इस मामले में अब जुलाई के दूसरे सप्ताह में आगे विचार करेगा. Also Read - तमिलनाडु सरकार मेडिकल प्रवेश में ओबीसी आरक्षण पर जल्द फैसले को लेकर पहुंची सुप्रीम कोर्ट  

इस मामले में पहली याचिका ‘श्री पंच दशबन जूना अखाड़ा’ के साधुओं और मृतक साधुओं के परिजनों ने दायर की है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि पालघर जिले में हुयी इस घटना की जांच राज्य पुलिस दुर्भावनापूर्ण तरीके से कर रही है. दूसरी याचिका घनश्याम उपाध्याय ने दायर की है और उन्होंने इस घटना की राष्ट्रीय जांच एजेन्सी से जांच कराने का अनुरोध किया है. इनमें से एक याचिकाकर्ता ने महाराष्ट्र सरकार के साथ ही केन्द्र, सीबीआई और महाराष्ट्र पुलिस के महानिदेशक को भी इस मामले में प्रतिवादी बनाया है. Also Read - ICAI CA Exam: आईसीएआई ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- सीए परीक्षा के आयोजन की व्यवहार्यता पर करेंगे विचार, जानें कब से होगा एग्जाम

कोविड-19 महामारी के दौरान लागू लॉकडाउन के बीच 16 अप्रैल को दो साधु अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिये कार से मुंबई के कांदिवली से गुजरात के सूरत जा रहे थे. पालघर जिले के गढ़चिंचली गांव में एक भीड़ ने उनकी गाड़ी रोकी और उन पर हमला कर दिया. हिंसक भीड़ ने पुलिस की मौजूदगी में ही दोनो साधुओं और उनके ड्राइवर की कथित रूप से पीट पीट कर हत्या कर दी थी. Also Read - ICAI CA July Exam: सुप्रीम कोर्ट से CA छात्रों को बड़ी राहत, परीक्षा में शामिल न होने पर माना जाएगा Opt Out Case

इस घटना में मारे गये व्यक्तियों की पहचान 70 वर्षीय चिकने महाराज कल्पवृक्षगिरि और 35 वर्षीय सुशील गिरि महाराज तथा 30 वर्षीय ड्राइवर नीलेश तेलगडे के रूप में हुयी थी. इस मामले की सीबीआई जांच के लिये दायर एक अलग याचिका पर सुनवाई करते हुये शीर्ष अदालत ने एक मई को महाराष्ट्र सरकार को जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था. श्री पंच दशबन जूना अखाड़ा के साधुओं की नयी याचिका में इस घटना की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने का अनुरोध किया है. याचिका में दावा किया गया है कि महाराष्ट्र पुलिस की जांच में दुर्भावना की आशंका है.

याचिका में कहा गया है कि सोशल मीडिया और खबरों में सामने आये अनेक वीडियो क्लिप घटनास्थल पर मौजूद पुलिस की सक्रिय संलिप्तता दर्शाते हैं जिन्हें इन तीनों व्यक्त्तियों को गैरकानूनी तरीके से एकत्र लोगों की भीड़ के हवाले करते देखा जा सकता है. याचिका के अनुसार पूरी घटना और इससे निबटने के तरीके अनेक सवालों को जन्म देते हैं जिनका जवाब आज तक नहीं मिला है और याचिकाकताओं को संदेह है कि इस घटना की स्वतंत्र एजेन्सी से जांच कराये बगैर इन सवालों का जवाब कभी नहीं मिल पायेगा.

याचिका में संबंधित प्राधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे याचिकाकर्ता के 28 अप्रैल के प्रतिवेदन पर उसके पक्ष में फैसला लें. इस प्रतिवेदन में घटनास्थल पर एक स्मारक बनाने के लिये भूमि आबंटित करने का अनुरोध किया गया है.

इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान याचिकाकताओं के वकील ने दावा किया कि इस मामले के गवाह आत्महत्या कर रहे हैं और ऐसी स्थिति में यह विश्वास करने की पूरी वजह है कि जांच सही दिशा में नहीं चल रही है. एक अन्य याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ से कहा कि उन्हें आशंका है कि इस घटना के साक्ष्य ही मिटा दिये जायेंगे जबकि महाराष्ट्र सरकार के वकील ने इन याचिकाओं का विरोध किया और कहा कि इसी तरह की याचिकायें बंबई उच्च न्यायालय में लंबित हैं.

एक याचिकाकर्ता ने पीड़ितों के परिवारों को समुचित मुआवजा दिलाने का भी अनुरोध किया है. भीड़ द्वारा कथित रूप से दो साधुओं सहित तीन व्यक्तियों की पीट पीट कर हत्या के मामले में पालघर जिले के कासा थानांतर्गत 18 अप्रैल को प्राथिमकी दर्ज की गयी थी. पुलिस ने इस तिहरे हत्याकांड के सिलसिले में एक सौ से भी ज्यादा व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है.