मुंबई: शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस गठजोड़ ने मंगलवार की शाम उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद के लिए अपना नेता चुना. इसके बाद शिवसेना अध्यक्ष ठाकरे ने राज्यपाल से मुलाकात की और ‘‘महाराष्ट्र विकास आघाड़ी’ की सरकार के गठन का दावा पेश किया. शिवसेना के एक नेता ने बताया कि उद्धव ठाकरे 28 नवंबर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. इससे पहले राकांपा प्रमुख शरद पवार ने तीनों दलों की संयुक्त बैठक में घोषणा की थी कि नयी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह एक दिसंबर को होगा, लेकिन उद्धव के राज्यपाल से मिलने के बाद कार्यक्रम में बदलाव किया गया.


शिवसेना के एक नेता ने बताया कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे जब राज्यपाल बी के कोश्यारी से मिलने राजभवन गए तो उनके साथ तीनों दलों के विधायक दल के नेता भी साथ थे. उन्होंने बताया, ‘‘हम राज्यपाल के सामने सरकार गठन के दावे के लिए एक संयुक्त बयान पेश कर रहे हैं. हम जरूरी प्रक्रिया के तहत, तीनों दलों के सभी विधायकों के समर्थन का प्रमाण भी राज्यपाल को पेश करेंगे.’’

तीनों दलों ने एक होटल में संयुक्त बैठक की जहां ठाकरे को गठबंधन का नेता चुना गया. ठाकरे परिवार से उद्धव पहले ऐसे नेता होंगे जो राज्य में शीर्ष राजनीतिक पद का प्रतिनिधित्व करेंगे. उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनकी सरकार प्रतिशोध की भावना से काम नहीं करेगी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हवाला देते हुए कहा, ‘‘सरकार गठन के बाद मैं अपने ‘बड़े भाई’ से मिलने दिल्ली जाऊंगा.’’ मोदी ने चुनावी रैलियों के दौरान उद्धव को ‘‘अपना छोटा भाई’’ बताया था.

बैठक में शरद पवार, राकांपा के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल, कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण, समाजवादी पार्टी के अबू आजमी, तीनों दलों के विधायक तथा अन्य मौजूद थे.

विधायकों की बैठक में शिवसेना प्रमुख और ‘महा विकास अघाड़ी’ के सीएम उम्मीदवार उद्धव ठाकरे ने कहा, “मैंने राज्य का नेतृत्व करने का कभी सपना नहीं देखा था. मैं सोनिया गांधी और अन्य लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूं. हम एक दूसरे पर विश्वास रखकर देश को एक नई दिशा दे रहे हैं.” विधायकों की मीटिंग के दौरान शिवसेना प्रमुख ने कहा, “मैं देवेंद्र फड़नवीस द्वारा उठाए गए सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हूं. मैं किसी चीज से नहीं डरता. झूठ हिंदुत्व का हिस्सा नहीं है. जरूरत पड़ने पर तुम हमें गले लगाओ और जब जरूरत न हो तुम हमें छोड़ दो. आपने हमें दूर रखने की कोशिश की.”

गौरतलब है कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने फडणवीस सरकार को बुधवार शाम पांच बजे तक विधानसभा के पटल पर बहुमत सिद्ध करने का निर्देश जारी किया था. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता देवेंद्र फडणवीस ने समर्थन जुटाने में असमर्थता जताते हुए शक्ति-परीक्षण से पहले ही मुख्मयंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. उनसे पहले राकांपा में वापस लौटे ‘बागी’ नेता अजित पवार ने भी उप-मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.